नै
नै ($फा.स्त्री.)-बाँसुरी, बन्सी, अल$गोज़ा; नरसल, नरकट, नय।नैच: ($फा.पु.)-हुक़्$के की नय।
नैज़: ($फा.पु.)-बरछी, भाला, कुंत, शक्ति, शंकु; $कलम बनाने के काम आनेवाला नरकट या नरसल।
नैज़:दार ($फा.वि.)-जिसके पास नैज़: हो, नैज़: अर्थात् बरछी या भाला चलानेवाला।
नैज़बरदार ($फा.वि.)-बरछी या भाला लेकर चलनेवाला।
नैज़:बरदारी ($फा.स्त्री.)-बरछी या भाला लेकर चलना।
नैज़बाज़ ($फा.वि.)-वह व्यक्ति जो बरछी या भाला चलाना जानता हो।
नैज़:बाज़ी ($फा.स्त्री.)-बरछी और भाला चलाने की महारत।
नैज़क ($फा.पु.)-छोटा नैज़:।
नैज़ार ($फा.पु.)-जहाँ नरसल बहुत हों, नरकट का जंगल।
नैयिर (अ.पु.)-बहुत चमकनेवाला सितारा; सूरज, सूर्य, रवि, दिवाकर, आफ़्ताब; चाँद, चन्द्रमा, शशि। 'नैयिरे आज़मÓ-सूर्य, सूरज। 'नैयिरे अस$गरÓ-चन्द्रमा।
नैयिरेन (अ.पु.)-दोनों चमकदार सितारे, चाँद और सूरज।
नैरंग ($फा.पु.)-छल, धोखा, $फरेब; माया, तिलिस्म।
नैरंगबाज़ ($फा.वि.)-मायावी, धूर्त, जादूगर; छली, मक्कार।
नैरंगबाज़ी ($फा.स्त्री.)-मायाकर्म, जादूगरी; छल, $फरेब।
नैरंगसाज़ ($फा.वि.)-दे.-'नैरंगबाज़Ó।
नैरंगसाज़ी ($फा.स्त्री.)-दे.-'नैरंगबाज़ीÓ।
नैरंगिए ज़मान: ($फा.स्त्री.)-कालचक्र, दुनिया का उलटफेर।
नैरंगिए नजऱ (अ.$फा.स्त्री.)-दृष्टि की विचित्रता; दृष्टि का भ्रम।
नैरंगिए हुस्न (अ.$फा.स्त्री.)-सौन्दर्य का मायाजाल, हुस्न की शोबद:बाज़ी।
नैरंगिए रोजग़ार (अ.$फा.स्त्री.)-भाग्य-चक्र, $िकस्मत का उतार-चढ़ाव, भाग्य का उलट-फेर।
नैरंगी ($फा.स्त्री.)-मायाकर्म, जादूगरी; छल, कपट, $फरेब; चित्त की चंचलता।
नैरंगीए ख़्ायाल (अ.$फा.पु.)-विचार-भ्रम, ख़्ायाल का धोखा।
नैरंगे अ़ालम (अ.$फा.पु.)-सृष्टि की चित्र-विचित्रता, दुनिया का उलट-फेर।
नैरंगे ज़मान: ($फा.पु.)-दे.-'नैरंगे अ़ालमÓ।
नैरंगे नजऱ (अ.$फा.पु.)-वह वस्तु जो आँखों को भ्रम में डाल दे।
नैरंज ($फा.पु.)-धोखा, जादू।
नैल (अ.पु.)-मिलना, प्राप्त होना।
नैले मराम (अ.पु.)-मनोरथ सिद्घ होना, इच्छा पूरी होना, मक़्सद हासिल होना।
नैशकर (अ.पु.)-गन्न, ईख, इक्षु।
नैसाँ ($फा.पु.)-बैसाख के महीने में होनेवाली बारिश, जिसके लिए प्रसिद्घ है कि इस पानी की प्रत्येक बूँद सीप में मोती बन जाती है; बैसाख-मास।
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