नि
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निअ़म (अ.स्त्री.)-'नेÓमतÓ का बहु., नेÓमतें, अच्छी-अच्छी चीजें़।निअ़ाल (अ.पु.)-'नाÓलÓ का बहु., जूते पादुकाएँ; घोड़े के नाल।
नि$कात (अ.पु.)-'नुक़्त:Ó का बहु., नुक़्ते, बिंदियाँ, शून्य।
निकात (अ.पु.)-'नुक्त:Ó का बहु., सूक्ष्म और गूढ़ बातें।
नि$काब (अ.स्त्री.)-मुखपट, मुखावरण, बु$र्का; ओट, पर्दा (न$काब)।
नि$काब$कशाई (अ.$फा.स्त्री.)-मुँह-दिखाई की रस्म, दुल्हन के मुँह से नि$काब उठाने की रस्म; किसी चित्र पर से पर्दा उठाने का उत्सव, अनावरण।
निकाबत (अ.स्त्री.)-तकली$फ पहुँचाना।
नि$काबत (अ.स्त्री.)-प्रशंसा करना, तारी$फ करना।
नि$काबपोश (अ.$फा.वि.)-जो अपना मुँह किसी कपड़े आदि से छिपाए हुए हो, जिसके मुँख पर नि$काब पड़ी हो।
नि$काबे रुख़्ा (अ.$फा.स्त्री.)-घँूघट, मुखपट, बु$र्का।
नि$कार (अ.पु.)-वैर, द्वेष, कीना।
निकाह (अ.पु.)-विवाह, ब्याह, पाणि-ग्रहण।
निकाहनाम: (अ.$फा.पु.)-वह पत्र जिसमें विवाह की शर्तें लिखी हों।
निकाही (अ.स्त्री.)-विवाहिता, विवाहित स्त्री, शादीशुद: औरत।
निकाहे सानी (अ.पु.)-पुनर्विवाह, दूसरा विवाह, पहले पति के मरने पर दूसरे व्यक्ति से ब्याह।
निको ($फा.वि.)-सुन्दर, हसीन; उत्तम, श्रेष्ठ, अच्छा।
निकोई ($फा.स्त्री.)-सुन्दरता, हुस्न; अच्छाई, उत्तमता।
निकोकार ($फा.वि.)-सदाचारी, अच्छे आचरणवाला।
निकोख़्वाह ($फा.वि.)-नेकी चाहनेवाला, अच्छा चाहनेवाला, शुभ-चिन्तक, हितैषी, भलाई चाहनेवाला।
निकोनाम ($फा.वि.)-नामवर, उत्तमयश।
निकोहिश ($फा.स्त्री.)-निन्दा, बुराई; भत्र्सना, डाँट-फटकार।
निकोहीद: ($फा.वि.)-निंदित, कुत्सित, धिक्कृत।
निक़्मत (अ.स्त्री.)-कष्ट, पीड़ा, यातना, अज़ार्ब; द्वेष, कीना।
निक्रि़स (अ.पु.)-कमर की जड़ से अँगूठे तक पूरे पाँव में होनेवाला एक दर्द।
निख़्वत (अ.स्त्री.)-अभिमान,अहंकार, घमण्ड, $गुरूर।
निख़्वतपसंद (अ.$फा.वि.)-अभिमानी, अहंकारी, मग़्ा्रूर।
निगर ($फा.प्रत्य.)-ताकनेवाला, देखनेवाला, जैसे-'दस्तनिगरÓ-दूसरे के हाथ की तर$फ देखनेवाला अर्थात् पराश्रय।
निगराँ ($फा.वि.)-जाँच-पड़ताल करनेवाला, निरीक्षक; रास्ता निहारनेवाला, राह देखनेवाला, प्रतीक्षक; संरक्षक, मुहा$िफज़; अभिभावक, सरपरस्त।
निगरानी ($फा.स्त्री.)-देख-रेख, निरीक्षण; संरक्षण, हि$फाज़त; अभिभावकता, सरपरस्ती।
निगह ($फा.स्त्री.)-'निगाहÓ का लघुरूप, दे.-'निगाहÓ।
निगहदाश्त ($फा.स्त्री.)-संरक्षण, निगरानी।
निगहबान ($फा.वि.)-संरक्षक, देख-भाल करनेवाला।
निगार ($फा.वि.)-लिखनेवाला, चित्र बनानेवाला, (पु.)-मूर्ति, प्रतिमा, बुत; चित्र, नक़्श; प्रेमपात्र, महबूब; प्रेयसी, प्रेमिका; हाथ-पाँव पर मेंहदी से बनाए हुए चित्र; (प्रत्य.)-चित्रित, जैसे-'जऱनिगारÓ-स्वर्ण-चित्रित।
निगार आलूद ($फा.वि.)-चित्रित किया हुआ, चित्रण किया हुआ।
निगारख़्ाान: ($फा.पु.)-मूर्ति-गृह, बुतख़्ाान:; तस्वीर-घर, चित्रालय; सजा हुआ मकान; वह स्थान जहाँ बहुत-सी सुन्दरियाँ एकत्र हों।
निगारिंद: ($फा.वि.)-लिखनेवाला, चित्र बनानेवाला।
निगारिश ($फा.स्त्री.)-चित्र, नक़्श; लेख, तहरीर।
निगारिस्तान ($फा.पु.)-चित्रालय, जहाँ बहुत-सी तस्वीरें हों, मूर्तिगृह; वह स्थान जहाँ बहुत-सी सुन्दरियाँ हों, जहाँ बहुत-सी हसीन शक्लें हों।
निगारीं ($फा.वि.)-चित्रित, नक़्शीन; सिंगार की हुई।
निगारेअर्मनी ($फा.स्त्री.)-$फर्हाद की प्रेमिका, शीरीं।
निगाश्त: ($फा.वि.)-लिखित, लिखा हुआ; चित्रित, मुनक़्$कश।
निगाश्तनी ($फा.अव्य.)-लिखने योग्य; चित्र बनाने योग्य।
निगाह ($फा.स्त्री.)-दृष्टि, नजऱ, प्रेक्षा।
निगाहदार ($फा.वि.)-संरक्षक, निगहबान, देख-रेख करनेवाला।
निगाहदाश्त ($फा.स्त्री.)-रक्षा, सुरक्षा, हि$फाज़त, देख-रेख, निगरानी।
निगाहबान ($फा.वि.)-देख-रेख करनेवाला, संरक्षक।
निगाहे$कह्र (अ.$फा.स्त्री.)-क्रोध की दृष्टि, $गुस्से की नजऱ, कोप-दृष्टि।
निगाहे $गलतअंदाज़ ($फा.वि.)-भ्रम में डालनेवाली दृष्टि, ऐसी दृष्टि जिसे हर व्यक्ति यह समझे कि उसी की आकर है।
निगाहे तअ़म्म$क (अ.$फा.स्त्री.)-सूक्ष्म-दृष्टि, गहरी नजऱ।
निगाहे नाज़ ($फा.स्त्री.)-नाज़ोअंदाज़ की दृष्टि, हाव-भाव वाली नजऱ।
निगाहे पर्वरिश ($फा.स्त्री.)-दयादृष्टि, कृपादृष्टि, मेह्रबानी की नजऱ।
निगाहेबद ($फा.स्त्री.)-कुदृष्टि, पापदृष्टि, बुरी नजऱ।
निगाहे मेह्र ($फा.स्त्री.)-दयादृष्टि, कृपादृष्टि, मेह्रबानी की नजऱ, करम की निगाह।
निगूँ ($फा.वि.)-अधोमुख, औंधा, उलटा।
निगूँतालेÓ (अ.$फा.वि.)-दे.-'निगूँबख़्तÓ।
निगूँबख़्त (अ.$फा.वि.)-हतभाग्य, औंधी $िकस्मतवाला, बदनसीब।
निगूँसार ($फा.वि.)-अधोमुख, औंधा, उलटा।
निगूँहिम्मत (अ.$फा.वि.)-हतोत्साह, पस्त हिम्मत, हतसाहस, पस्त हौसला।
निज़ाअ़ (अ.स्त्री.)-वैर, शत्रुता, दुश्मनी; दंगा, $फसाद, झगड़ा।
निज़ाए लफ्ज़़ी (अ.स्त्री.)-वाक्कलह, शाब्दिक-कलह, ज़बानी झगड़ा, केवल बातों का झगड़ा।
निज़ाद ($फा.स्त्री.)-ख़्ाानदान, कुल, वंश, नसब। दे.-'नज़ादÓ, वह अधिक शुद्घ है।
निजा$फ (अ.स्त्री.)-चौखट, द्वार का छज्जा; विद्वान्, अ़ालिम, विषय का जानकार।
निज़ाम (अ.पु.)-प्रबन्ध, व्यवस्था, इंतिज़ाम; शैली, पद्घति, तजऱ्; क्रम, सिलसिला; संघटन, तंज़ीम।
निज़ामत (अ.क्रि.)-प्रबन्ध करना, योजनाबद्घ करना।
निज़ामी (अ.वि.)-प्रबन्ध से सम्बन्ध रखनेवाला, व्यवस्था से सम्बन्धित; सैनिक, $फौजी।
निज़ामे$फीसा$गोर्स (अ.पु.)-दे.-'निज़ामे शम्सीÓ।
निज़ामेबत्लीमूस (अ.पु.)-वह व्यवस्था जिसमें माना गया है कि पृथ्वी अचल है तथा चाँद-सूरज आदि ग्रह उसके चारों तर$फ घूमते हैं।
निज़ामे शम्सी (अ.पु.)-वह व्यवस्था जिसमें यह माना गया है कि सूरज अचल है तथा पृथ्वी और दूारे ग्रह उसके चारों ओर घूमते हैं, आधुनिक वैज्ञानिकों का भी यही मत है।
निज़ामे सल्तनत (अ.पु.)-शासन-व्यवस्था, राज्य-प्रबन्ध, राज की व्यवस्था।
निज़ाम हुकूमत (अ.पु.)-दे.-'निज़ामे सल्तनतÓ।
निज़्द ($फा.वि.)-पास, निकट, $करीब, समीप, नज़दीक। दे.-'नज़्दÓ, दोनों शुद्घ हैं।
निदा (अ.स्त्री.)-आह्वïान, बुलाना, पुकारना; वह शब्द जो बुलाने के लिए प्रयुक्त हो, जैसे-'अरेÓ, 'ओÓ, 'एÓ आदि।
निदाएग़ैब (अ.स्त्री.)-आकाशवाणी, देव-वाणी, ग़ैबी आवाज़।
निफ़ा$क (अ.पु.)-फूट, एकता का न होना; वैर, दुश्मनी, शत्रुता।
निफ़ा$कअंगेज़ (अ.$फा.वि.)-आपस में फूट डालनेवाली बात, विरोध करानेवाली बात।
निफ़ा$कपर्वर (अ.$फा.वि.)-परस्पर फूट डालनेवाला, भेदकर्ता।
निफ़ा$केबाहमी (अ.$फा.स्त्री.)-पारस्परिक विरोध, आपस की फूट।
नि$फास (अ.पु.)-वह रक्मस्राव जो प्रसूता के शरीर से बच्चा जनने के चालीस दिन तक होता रहे।
निफ़्त: (अ.पु.)-छाला, फफोला, आब्ला।
निफ़्त ($फा.पु.)-मिट्टी का तेल; बारूद।
निफ़्तअंदाज़ ($फा.वि.)-तोप दा$गनेवाला, बारूदी हथियार चलानेवाला, गोलंदाज़।
निफ्ऱीं ($फा.स्त्री.)-लाÓनत, धिक्कार।
निब्रास (अ.पु.)-दीप, दीपक, चिरा$ग।
निमल (अ.पु.)-चंचल; फुर्तीला।
निया ($फा.पु.)-शान, प्रतिष्ठा, इज़्ज़त; दादा, बाबा, पितामह; नाना, मातामह; मामा, मामूँ, मातुल, माँ का भाई।
नियाइश ($फा.स्त्री.)-प्रशंसा, तारी$फ; स्तुति, हम्दोसना; शाबाश, साधुवाद।
नियागाँ ($फा.पु.)-'नियाÓ का बहु., पूर्वज, पुरखे, बुज़ुर्ग।
नियाज़ ($फा.पु.)-निवेदन, प्रार्थना, गुज़ारिश; इच्छा, आजऱ्ू, ख़्वाहिश; परिचय, जान-पहचान; भेंट, साक्षात्, मुला$कात, (स्त्री.)-चढ़ावा, भेंट; चढ़ावे की मिठाई; $फातहा, मुर्दे या किसी बुज़ुर्ग का खाना आदि।
नियाज़आगीं ($फा.वि.)-दे-'नियाज़मंदÓ।
नियाज़केश ($फा.वि.)-दे-'नियाज़मंदÓ।
नियाजऩाम: ($फा.पु.)-विनय-पत्र, वक्ता अपने पत्र के लिए बोलता है।
नियाज़मंद ($फा.वि.)-भक्त, $िफदाई; आज्ञाकारी, ताबेदार; मित्र, दोस्त; परिचित, मुला$काती।
नियाज़मंदान: ($फा.अव्य.)-नम्रतापूर्ण, आज्ञाकारियों-जैसा, भक्तों-जैसा।
नियाज़मंदी ($फा.स्त्री.)-भक्ति; मैत्री, दोस्ती; आज्ञाकारिता।
नियाज़ीदन ($फा.पु.)-निवेदन करना; नम्रता दिखाना।
नियाब (अ.पु.)-'नाबÓ का बहु., सामने के दाँतों और दाढ़ों के बीचवाले दाँत।
नियाबत (अ.स्त्री.)-दूत-कर्म, एलचीपन; स्थानापन्नता, प्रतिनिधित्व, $काइममु$काम; $काइममु$कामी; अभिकर्म, एजेंटी।
नियाम ($फा.पु.)-म्यान, मियान, कोष, तलवार का खोल या $िगला$फ।
नियोश ($फा.प्रत्य.)-सुननेवाला, जैसे-'ह$कनियोशÓ-सच्ची बात सुननेवाला।
नियोशिंद: ($फा.वि.)-श्रोता, सुननेवाला।
निवाल: ($फा.पु.)-ग्रास, कवल, लुक़्मा, उतना खाना जितना एक बार में मुँह में रखकर खाया जाए।
निविश्त: ($फा.पु.)-लिखित, लिखा हुआ; लेख, तहरीर।
निविश्त ($फा.वि.)-लिखा हुआ, लिखित।
निविश्तए $िकस्मत (अ.$फा.पु.)-दे.-'निविश्तए त$कदीरÓ।
निविश्तए त$कदीर (अ.$फा.पु.)-भाग्य-रेखा, $िकस्मत का लिखा।
निशस्त: ($फा.वि.)-बैठा हुआ।
निशस्त ($फा.स्त्री.)-बैठक, बैठने की मुद्रा; गोष्ठी, सभा, मज्लिस; एक बार की बैठक या जलसा।
निशस्तगाह ($फा.स्त्री.)-बैठक, बैठने का स्थान, दीवानख़्ााना।
निशस्तो बरख़्ाास्त ($फा.स्त्री.)-उठना-बैठना, आना-जाना।
निशाँ ($फा.पु.)-'निशानÓ का लघुरूप, दे.-'निशानÓ। (प्रत्य.)-बैठानेवाला, जैसे-'ख़्ाातिरनिशाँÓ-दिल में बैठाने या जमानेवाला। 'निशाँ भी मिल न पाएँगे तुझको मेरे $कदमों के, कभी न करना तअ़क़्क़ुब मेरा पलट जा तूÓ-माँझी
निशाँज़द: ($फा.वि.)-चिह्निïत, अंकित, जिस पर निशान हो।
निशाँदेही ($फा.स्त्री.)-निशान बताना, पता देना।
निशाख़्तन ($फा.पु.)-विश्वास करना, भरोसा करना।
निशाद ($फा.पु.)-शपथ दिलाना, $कसम दिलाना।
निशान: ($फा.पु.)-लक्ष्य, वह स्थान जिस पर निशाना लगाया जाए; ताकना, निशाना मारना।
निशान:अंदाज़ ($फा.वि.)-लक्ष्यभेदी, ठीक निशाना लगानेवाला।
निशान ($फा.पु.)-पहचान, आसार, चिह्न, अ़लामत; धब्बा, दा$ग; खोज, तलाश, पता, सुरा$ग; मुह्र का चिह्नï; झण्डा, पताका, ध्वज।
निशानची ($फा.वि.)-लक्ष्य को भेदनेवाला, अच्छा निशाना लगानेवाला; हाथ में झण्डा लेकर आगे चलनेवाला।
निशानी ($फा.स्त्री.)-यादगार, स्मृति-चिह्नï; निशान, चिह्नï; लक्षण, अ़लामत; पहचान, शिनाख़्त।
निशाने$कदम (अ.$फा.पु.)-पद-चिह्नï, पाँव के निशान, चलते समय रास्ते में बननेवाली पाँवों की छाप, निशानेपा।
निशानेपा ($फा.पु.)-दे.-'निशाने$कदमÓ।
निशानेमंजि़ल (अ.$फा.पु.)-मंजि़ल का पता, पड़ाव की पहचान, गनतव्य-स्थान की निशानी।
निशानेमील (अ.$फा.पु.)-सड़क के किनारे लगे मील के वह पत्थर जो यात्रियों को वहाँ से किसी स्थान की दूरी दर्शाते हैं; संगेमील।
निशानेराह ($फा.पु.)-वह चिह्नï जो मार्ग का पता दे, इस बात की जानकारी कि रस्ता किधर है; इस बात की जानकारी कि वहाँ से अपेक्षित स्थल कितनी दूर है; सड़क किनारे लगा मील का पत्थर या अन्य प्रकार का पट्ट अथवा बोर्ड आदि।
निशेद ($फा.पु.)-गान, नग़्मा, गाने की आवाज़।
निशेदख़्वाँ गानेवाला, गायक; मधुर आवाज़ में सुनानेवाला, मीठी आवाज़ में पढऩेवाला, तरन्नुमरेज़।
निशेब ($फा.पु.)-नीची ज़मीन; निचाई, अवनति, पस्ती। 'नशेबÓ भी प्रचलित।
निशेबो$फराज़ ($फा.पु.)-ऊँचा-नीचा; बलन्दी और पस्ती, तरक़्$की और अवनति; दुनिया की ऊँच-नीच।
निशेमन ($फा.पु.)-'नशेमनÓ भी प्रचलित है, घोंसला, कुलाय।
निश्कुज ($फा.स्त्री.)-चुटकी, बकोटा।
निश्तर ($फा.पु.)-'नश्तरÓ भी प्रचलित है, शल्य, चीर-फाड़ का यंत्र अथवा आला।
निश्तरकद: ($फा.पु.)-वह स्थान जहाँ चीर-फाड़ हो, ऑपरेशन-थिएटर, शल्य-चिकित्सा-कक्ष।
निश्तरजऩ ($फा.वि.)-शल्य-चिकित्सा करनेवाला, ऑपरेशन करनेवाला, निश्तर मारनेवाला।
निश्तरे $फस्साद (अ.$फा.पु.)-वह शल्य अथवा निश्तर जिससे नसों का रक्त निकाला जाता है।
निश्तरे रगजऩ ($फा.पु.)-दे.-'निश्तरे $फस्सादÓ।
निश्लीदन ($फा.पु.)-चुटकी लेना।
निश्वत (अ.स्त्री.)-समाचार लेना।
निसा (अ.स्त्री.)-स्त्रियाँ, औरतें, नारियाँ।
निसाब (अ.पु.)-आधार, मूल; पूँजी, सरमाया।
निसाबे ज़कात (अ.पु.)-वह धन जिस पर कर आवश्यक हो जाता है, वह धन जिस पर ज़कात वाजिब हो जाती है। (पहले इस प्रकार का धन पचास तोला चाँदी और साढ़े सात तोला सोना माना जाता था)।
निसाबे ताÓलीम (अ.पु.)-पाठ्यक्रम, पाठ्य-पुस्तकें, वे पुस्तकें जो किसी पाठशाला या कक्षा में पढ़ाई जाती हों।
निसार (अ.पु.)-न्योछावर, सद्क़:; बलि, $कुर्बान; $िफरेफ़्त:, मुग्ध।
निसारे यार (अ.$फा.पु.)-प्रेमिका पर न्योछावर।
निस्$फ (अ.$वि.)-आधा, अद्र्घ।
निस्$फुन्नहार (अ.पु.)-मध्याह्नï, दोपहर।
निस्$फुल्लैल (अ.स्त्री)-आधी रात, अद्र्घ रात्रि।
निस्बत (अ.स्त्री.)-लगाव, सम्पर्क; सम्बन्ध, तअ़ल्लु$क; सगाई, मँगनी; तुलना, समता, बराबरी।
निस्य: (अ.पु.)-ऋण, उधार, $कजऱ्।
निस्याँ (अ.पु.)-'निस्यानÓ का लघुरूप, दे.-'निस्यानÓ।
निस्यान (अ.पु.)-भूल, विस्मृति।
निस्रीं (अ.पु.)-सेवती नामक एक फूल।
निस्वत (अ.स्त्री.)-स्त्रियाँ, औरतें, नारियाँ।
निस्वाँ (अ.स्त्री.)-'निसाÓ का बहु., औरतें, स्त्रियाँ, नारियाँ।
निस्वानियत (अ.स्त्री)-स्त्रीत्व, औरतपन, जऩानापन, नरदारत्व।
निस्वानी (अ.स्त्री.)-स्त्रियों अथवा औरतों का, स्त्रियों अथवा औरतों से सम्बन्ध रखनेवाला।
निस्वानीयत (अ.स्त्री.)-दे.-'निस्वानियतÓ, दोनों उच्चारण शुद्घ हें।
निहल: (अ.स्त्री.)-मधु मक्खी, शहद की मक्खी।
निहाँ ($फा.वि.)-छिपा हुआ, गुप्त।
निहाँख़्ाान: ($फा.पु.)-तलघर, अधोगृह, तहख़्ााना।
निहानी ($फा.वि.)-आन्तरिक, भीतरी, अंदरूनी।
निहाद: ($फा.वि.)-रखा हुआ।
निहाद ($फा.स्त्री.)-प्रकृति, स्वभाव, आदत; बुनियाद, आधार; (प्रत्य.)-रखा हुआ, जैसे-ÓदिलनिहादÓ-जहाँ दिल रखा हो; स्वभाववाला, जैसे-'नेकनिहादÓ-अच्छे स्वभाववाला।
निहायत (अ.स्त्री.)-अत्यन्त, बहुत अधिक; अन्त, छोर, हद।
निहायतदर्ज: (अ.वि.)-बहुत अधिक, बहुत जिय़ादा।
निहाल ($फा.पु.)-पौधा, छोटा पेड़, (वि.)-प्रसन्न, प्रफुल्ल, ख़्ाुश; समृद्घ, मालामाल, धन-सम्पन्न।
निहालच: ($फा.पु.)-छोटे बच्चों का बिछौना जिस पर वे गू-मूत करते हैं।
निहालीं ($फा.स्त्री.)-दे.-'निहालीÓ।
निहाली ($फा.स्त्री.)-बिस्तर, तोशक।
निहिंद: ($फा.वि.)-रखनेवाला।
निहुफ़्त: ($फा.वि.)-छिपा हुआ, गुप्त, पोशीदा।
निहुफ़्त ($फा.वि.)-गुप्ति, छिपाव, पोशीदगी।
निहुफ़्तगी ($फा.स्त्री.)-छिपाव, गुप्ति, पोशीदगी।
निहुफ़्तनी ($फा.अव्य.)-छिपाने योग्य, गुह्य, गोप्य, गोपनीय।
निहेब ($फा.पु.)-डर, भय, ख़्ाौ$फ, त्रास; लूटमार, $गारतगरी; घोर नाद, भयानक आवाज़।
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