पो
पोइद: ($फा.पु.)-दौड़ा हुआ।पोइय: ($फा.स्त्री.)-$कदम, घोड़े की चाल-विशेष।
पोक ($फा.पु.)-खेती का अन्न।
पोच: ($फा.स्त्री.)-जलौका, जोंक, रक्तपा।
पोच ($फा.वि.)-कमीना, नीच, अधम; अकुलीन, बदनस्ल; लम्पट, लो$फर; निकम्मा, नाकारा; निरर्थक, बेमाÓनी, व्यर्थ का, $फुज़ूल; अश्लील, $फोह्श; वह वस्तु जो बिलकुल ही बेकार हो।
पोचगो ($फा.वि.)-बेकार की बातें करनेवाला, व्यर्थभाषी, अनर्थवादी।
पोचगोई ($फा.स्त्री.)-व्यर्थवाद, बकवास, मिथ्यावाद।
पोचबा$फ ($फा.वि.)-दे.-'पोचगोÓ।
पोचबा$फी ($फा.स्त्री.)-दे.-'पोचगोईÓ।
पोचबीं ($फा.वि.)-संकुचित-दृष्टि, तंग-नजऱ।
पोचबीनी ($फा.स्त्री.)-दृष्टि-संकोच, तंगनजऱी।
पोज़: ($फा.पु.)-दे.-'पोज़Ó।
पोज़बंद ($फा.पु.)-दे.-'पोज़बंदÓ।
पोज़ ($फा.पु.)-थूथन, थूथनी, नथने सहित पशुओं का मुँह।
पोज़बंद ($फा.पु.)-एक प्रकार का छींका, जो पशुओं के मुँह पर चढ़ाया जाता है, मुसीका।
पोज़माल ($फा.पु.)-थूथन अथवा थूथनी में डालने का फन्दा।
पोजि़श ($फा.स्त्री.)-विवशता, मज़बूरी, उज्ऱ।
पोजि़शपज़ीर ($फा.वि.)-विवशता पर ध्यान देकर क्षमा करनेवाला, उज्ऱ माननेवाला, किसी की मज़बूरी को समझनेवाला।
पोज़ीद: ($फा.वि.)-जिसने अपनी मज़बूरी बताई हो, जिसने अपनी विवशता प्रकट की हो, जिसने उज्ऱ किया हो।
पोज़ीदन ($फा.पु.)-आपत्ति प्रकट करना, कार्य करने में असमर्थता दिखाना।
पोत: ($फा.पु.)-लगान, मालगुज़ारी, राजस्व; मरूजऩ, भांडागार।
पोत:दार ($फा.पु.)-कोषाध्यक्ष, खंजाची।
पोत ($फा.पु.)-पेट और सीने में जो कुछ हो, आँतें, तिल्ली, जिगर, हृदय आदि।
पोदीन: ($फा.पु.)-एक सुप्रसिद्घ बूटी, जिसकी पत्ती औषध और चटनी-अचार में काम आती है; एक सुगन्धित पत्ती, प्रणास।
पोय: ($फा.पु.)-घोड़े की एक चाल।
पोयाँ ($फा.वि.)-दौड़ता हुआ।
पोया ($फा.वि.)-दौड़ता हुआ; दौडऩेवाला।
पोल: ($फा.पु.)-बिगड़ा और फैला हुआ फल।
पोल ($फा.पु.)-ताँबे का सिक्का, पैसा।
पालाद ($फा.पु.)-दे.-'$फौलादÓ।
पोलाब ($फा.वि.)-दृष्टिगोचर, जो दिखाई पड़े, मर्ई।
पोलाबी ($फा.वि.)-अनुभव होनेवाली वस्तु।
पोले का$गज़ी ($फा.पु.)-नोट, का$गज़ का रुपया।
पोले स$फेद ($फा.पु.)-रुपया, चाँदी का सिक्का।
पोले सियाह ($फा.पु.)-पैसा, ताँबे का सिक्का।
पोश ($फा.प्रत्य.)-छिपानेवाला, जैसे-'ऐबपोशÓ-दोष छिपानेवाला।
पोशा ($फा.पु.)-पहननेवाला।
पोशाक ($फा.स्त्री.)-वस्त्र, वसन, परिच्छद, पहनने के कपड़े।
पोशानीदन ($फा.क्रि.)-पहनाना, ढँकना।
पोशिंद: ($फा.वि.)-पहननेवाला; छिपानेवाला।
पोशिश ($फा.स्त्री.)-पहनावा, वस्त्र, लिबास।
पोशीद: ($फा.वि.)-छिपाया हुआ, गुप्त; ख़्िाल्अ़त; पहनाया हुआ; शिकारी का जाल।
पोशीदगी ($फा.स्त्री.)-छिपाव, दुराव; पहनाव।
पोशीदनी ($फा.वि.)-छिपाने योग्य; पहनाने योग्य; पहनने के कपड़े।
पोसीद: ($फा.वि.)-बहुत पुराना और घिसा-पिटा, जीर्ण-शीर्ण, जर्जर।
पोस्त: ($फा.पु.)-डाकख़्ााना, पोस्ट ऑ$िफस।
पोस्त ($फा.पु.)-अफीम के फल के दाने; $गीबत, पिशुनता; पेड़ की छाल; खाल, त्वचा, जिल्द।
पोस्तकंद: ($फा.वि.)-छिला हुआ, जिसका छिलका उतार दिया गया हो; स्पष्ट, बिलकुल सा$फ; खुला हुआ।
पोस्ततख़्त ($फा.पु.)-साधुओं का बिछौना जो हिरण या शेर की खाल से बना हो।
पोस्तमाल ($फा.पु.)-चमड़ा मढ़ी हुई वस्तु।
पोस्तीं ($फा.स्त्री.)-'पोस्तीनÓ का लघुरूप, दे.-'पोस्तीनÓ।
पोस्तींदोज़ ($फा.वि.)-पोस्तीन सीनेवाला अर्थात् बनानेवाला।
पोस्ती ($फा.वि.)-अ$फीम खानेवाला, मदक पीनेवाला, मदकची, अ$फीमवी।
पोस्तीख़्ाान: ($फा.पु.)-वह स्थान जहाँ अ$फीम मिलती हो, मदकख़्ाान:।
पोस्तीन ($फा.स्त्री.)-लोमड़ी, समूर, सिंजाब आदि रुएँदार जन्तुओं की खाल से बनाया हुआ कोट, जो शीत-प्रदेशों में पहना जाता है, इसके रुएँ अन्दर तथा खाल बाहर रहती है।
पोस्तीने गुर्ग ($फा.स्त्री.)-भेडि़ए की खाल या उसका पोस्तीन।
पोस्तीने रोबाह ($फा.स्त्री.)-लोमड़ी की खाल या उसका पोस्तीन।
पोस्तीने शेर ($फा.स्त्री.)-शेर की खाल या उसका पोस्तीन।
पोस्तीने हिज़ब्र (अ.$फा.स्त्री.)-व्याघ्र की खाल या उसका पोस्तीन।
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