न
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नंग ($फा.पु.)-लज्जा, शर्म, हया; मान, प्रतिष्ठा, इज़्ज़त; दोष, आर, ऐब, कलंकनंगे अज्दाद (अ.$फा.पु.)-वंश और कुटुम्ब को बदनाम करने वाला, जो व्यक्ति अपने दुराचरण के कारण अपने बाप-दादा के नाम को बट्टा लगाता हो, कुलघालक, कुलकलंक।
नंगे अस्ला$फ (अ.$फा.पु.)-दे.-'नंगे अज्दादÓ।
नंगे इंसानियत (अ.$फा.पु.)-मानवता के नाम पर कलंक लगानेवाला, ऐसा कार्य जो मानवता के दृष्टिकोण से लज्जाजनक हो।
नंगे ख़्ालाइक़ (अ.$फा.पु.)-जो व्यक्ति अपने बुरे आचरण के कारण सर्वसाधारण के लिए लज्जा का कारण हो।
नंगे ख़्ाानदान (अ.$फा.पु.)-कुटुम्ब को बदनाम करनेवाला, अपने कुल के लिए निन्दा का कारण, कुलांगार, कुलकलंक।
नंगोनाम (फ़ा.पु.)-मान-प्रतिष्ठा, लिहाज़, शर्म; लज्जा, $गैरत; मर्यादा, व$कार; सतीत्व, इस्मत।
नंगोनामूस (अ.$फा.पु.)-दे-'नंगोनामÓ।
न ($फा.अव्य.)-नहीं, निषेध-वाचक।
नअ़त (अ.स्त्री.)-स्तुति, प्रशंसा, तारी$फ; मुहम्मद साहब की स्तुति।
नअ़म (अ.अव्य.)-हाँ, जी हाँ, (अ.पु.)-पशु, चौपाया।
नअ़ाइम (अ.स्त्री.)-पूर्वाषाढ़, बीसवाँ नक्षत्र।
नईक़ (अ.स्त्री.)-काँव, काँव, कौए की आवाज़।
नईम (अ.पु.)-स्वर्ग, बिहिश्त, जन्नत; पुण्य, भलाई, नेकी; नेÓमत, दिव्योपहार।
नऊज़्ाुबिल्लाह (अ.अव्य.)-हम ईश्वर से पनाह माँगते हैं।
न$कवी (अ.पु.)-दसवें इमाम हज्ऱत अली न$की की संतान का व्यक्ति।
न$काइस (अ.पु.)-'नक़्सÓ का बहु., बुराइयाँ, ख़्ाराबियाँ, त्रुटियाँ।
न$कावत (अ.स्त्री.)-शुद्घता, पवित्रता, पुनीतता, निर्मलता, पाकीजग़ी।
न$काहत (अ.स्त्री.)-वह कमज़ोरी या निर्बलता जो रोग-मुक्ति के बाद बा$की रहती है; कमज़ोरी, निर्बलता, अशक्ति, नातुवानी।
नकिर: (अ.पु.)-वह संज्ञा जो एक जाति की सब चीज़ों पर बोली जाए; जातिवाचक संज्ञा (व्या.); अपरिचय, अनजानपन।
न$की (अ.वि.)-विशुद्घ, ख़्ाालिस, पवित्र, निर्मल, (पु.)-बारह इमामों में से दसवें इमाम का नाम।
न$कीज़ (अ.स्त्री.)-शत्रुता, दुश्मनी, वैर, अदावत, (वि.)-शत्रु, दुश्मन, वैरी; विपरीत, उलटा, बरअ़क्स।
न$कीब (अ.पु.)-वह व्यक्ति जो किसी राजा-महाराजा की सवारी के आगे-आगे आवाज़ लगाता हुआ चलता है, चोबदार; वह व्यक्ति जो दरबार के समय राजा-महाराजा से भेंट के लिए जानेवाले का नाम ज़ोर से पुकारता है।
नकीरैन (अ.पु.)-इस्लामी मान्यता के अनुसार वे दो $िफरिश्ते जो मरनेवाले से $कब्र में सवाल-जवाब करते हैं, मुन्कर और नकीर।
न$कीह (अ.वि.)-पवित्र, निर्मल, शुद्घ, ख़्ाालिस, बेमेल।
न$कूअ़ (अ.पु.)-वह पानी जिसमें दवा या मेवा आदि भिगोये जाएँ।
नक़्$काद (अ.पु.)-आलोचक, समालोचक, साहित्यिक गुण-दोष बतानेवाला; खोटा-खरा परखनेवाला, पारखी।
नक़्$कादान: (अ.$फा.अव्य.)-समालोचक की तरह से, नक़्$काद की तरह से, गुण-दोष परखने के दृष्टिकोण से।
नक़्$कादी (अ.स्त्री.)-समालोचना, नक़्$काद का काम, परख।
नक़्$कार: (अ.पु.)-नगाड़ा, भेरी, धौंसा, दुंदुभि।
नक़्$कार:जऩ (अ.$फा.पु.)-नगाड़ा या धौंसा बजानेवाला, दुंदुभि बजानेवाला।
नक़्$कार:नवाज़ (अ.$फा.पु.)-दे.-'नक़्$कार:जऩÓ।
नक़्$कार:ख़्ाान: (अ.$फा.पु.)-वह स्थान जहाँ नक़्$कारे बजते हैं।
नक़्$कारची (अ.$फा.पु.)-नगाड़ा, नौबत या नक़्$कारा बजानेवाला; एक जाति-विशेष जो जो शहनाई और दुंदुभि बजाती है।
नक़्$काल (अ.पु.)-अनुकर्ता, नक़्ल करनेवाला; रूप भरनेवाला, बहुरूपिया; भाँड़।
नक़्$काली (अ.स्त्री.)-अनुकरण, तक़्लीद; नक़्ल का काम; भाँड़ों का काम; बहुरूपिये का काम।
नक़्$काश (अ.पु.)-तस्वीर बनानेवाला, चित्रकार, चितेरा, मुसव्विर, चित्र खींचनेवाला, चित्र में रंग भरनेवाला।
नक़्$काशी (अ.स्त्री.)-चित्र खींचना, तस्वीर बनाना।
नक़्$काशे अज़ल (अ.पु.)-सृष्टि की रचना करनेवाला, संसार बनानेवाला, जगत्-सृष्टा।
नक्ज़़ (अ.पु.)-भंग करना, तोडऩा।
नक्ज़़े अम्न (अ.पु.)-शान्ति भंग करना, अम्न में ख़्ालल डालना, झगड़ा और बल्वा करना।
नक़्द (अ.पु.)-रुपया-पैसा, सोने-चाँदी का सिक्का; उधार का उलटा, कैश; सरमाया, पँूजी।
नक़्दी (अ.स्त्री.)-नक़्द रुपया, धन-दौलत।
नक़्दीन: (अ.$फा.पु.)-नक़्दी, नक़्द रुपया।
नक़्दे जाँ (अ.$फा.पु.)-प्राणधन, प्राण-रूपी धन।
नक़्दे दिल (अ.$फा.पु.)-हृदय-रूपी धन।
नक़्दोजिंस (अ.पु.)-नक़्द रुपया औा सामान अस्बाब आदि।
नक़्दोनिस्य: (अ.पु.)-नक़्द और उधार। नक़्द का अर्थ है संसार के सुख जो इस समय उपलब्ध हैं और 'निस्य:Ó अर्थात् उधार का मतलब है वे सुख जो परलरेक में मिलेंगे।
नक़्ब (अ.स्त्री.)-सेंध, सेंधमारी, सिंदिली।
नक़्बजऩ (अ.$फा.पु.)-सेंध लगानेवाला, कुंभिल, खानिल, संधितस्कर।
नक़्बजऩी (अ.$फा.स्त्री.)-सेंध लगाना, सेंध लगाकर चोरी करना, अभिहार, संधिभेद।
नक्बत (अ.स्त्री.)-निर्धनता, कंगाली, दरिद्रता।
नक़्ल (अ.स्त्री.)-प्रतिलिपि, कॉपी; अनुकरण, तक़्लीद; आदर्श, नमूना; चुटकुला, लती$फा; कथा-कहानी; भाँड़ों का स्वाँग; (पु.)-स्थानांतरण, एक स्थान से दूसरे स्थान को जाना।
नक़्ल नवीस (अ.$फा.पु.)-वह कर्मचारी जो सरकारी का$गज़ों की नक़्लें देता है।
नक़्ली (अ.वि.)-बनावटी, कृत्रिम, मस्नूई; मिथ्या, झूठ, कूट, जाली; काल्पनिक, $फजऱ्ी।
नक़्ले मकान (अ.पु.)-एक स्थान से दूसरे स्थान को जाना, जगह बदलना, स्थानांतरण।
नक़्ले वतन (अ.पु.)-अपना देश छोड़कर दूसरे देश में जाकर रहना, स्वदेश-त्याग, प्रवास।
नक़्श: (अ.पु.)-किसी देश आदि का चित्र, मानचित्र; आकृति, शक्ल; चेहरे की साख़्त, मुखाकृति; ढंग, शैली, तजऱ्; सज-धज, वज़ा $कता; चेष्टा, हुलिया; दशा, हालत; साँचा, $कालिब।
नक़्श:जात (अ.$फा.पु.)-'नक़्श:Ó का बहु., नक़्शे।
नक़्श:नवीस (अ.$फा.पु.)-नक़्शा बनानेवाला, एक सरकारी कर्मचारी जो गाँव या इमारतों के नक़्शे अथवा चित्र बनाता है।
नक़्श (अ.पु.)-अंकित, खुदा हुआ; चित्र, तस्वीर; कवच, ताÓवीज़; उभरा हुआ चिह्नï; बेल-बूटे।
नक़्शए हद्दोबस्त (अ.$फा.पु.)-किसी गाँव की चौहद्दी और खेतों की नाप-तोल का नक़्शा।
नक़्श कल हजर (अ.पु.)-पत्थर की लकीर, पत्थर का चिह्नï, न मिटनेवाली चीज़।
नक़्शगर (अ.$फा.पु.)-चित्रकार, नक़्$काश।
नक़्शतराज़ (अ.$फा.पु.)-दे.-'नक़्शगरÓ।
नक़्शपरदाज़ (अ.$फा.पु.)-दे.-'नक़्शगरÓ।
नक़्शबंद (अ.$फा.पु.)-खुदा हुआ, अंकित, लिखित; तस्वीर बनानेवाला, चित्रकार, मुसव्विर; एक बुज़ुर्ग की उपाधि।
नक़्शबंदी (अ.$फा.स्त्री.)-मूर्तिकला, चित्रकारी, मुसव्विरी; ख़्वाज: नक़्शबंद का अनुयायी।
नक़्श ब दीवार (अ.$फा.पु.)-भीत या दीवार पर बनाया हुआ चित्र, भित्तिचित्र; दीवार पर बने चित्र-जैसा मौन, निसतब्ध, निश्चल।
नक़्श बर आब (अ.$फा.पु.)-पानी पर बनाया हुआ चित्र, अर्थात् नश्वर और भंगुर अथवा असंभव, अशक्य।
नक़्श बर दीवार (अ.$फा.पु.)- दे.-'नक़्श ब दीवारÓ।
नक़्शी (अ.$फा.वि.)-वह, जिस पर चित्र बना हो, जिस पर नक़्श हो।
नक़्शे अव्वल (अ.पु.)-चित्रकार का बनाया हुआ सर्वप्रथम चित्र जिसमें कुछ त्रुटियाँ अवश्य रहती हैं।
नक़्शे $कदम (अ.पु.)-पद-चिह्नï, पाँव के निशान। 'मैं तो राहों में तेरे नक़्शे $कदम देखा किया, $का$िफले गुजऱा किए सब गर्मी-ए-रफ़्तार सेÓ-माँझी
नक़्शे ख़्ायाली (अ.पु.)-काल्पनिक चित्र, $फजऱ्ी तस्वीर; हवाई $िकले, $फजऱ्ी मंसूबे।
नक़्शे गुज़ारिश (अ.पु.)-कहने योग्य बात, बयान करने योग्य वार्ता, वर्णनीय कथा।
नक़्शे जमाली (अ.पु.)-वह यंत्र (नक़्श-तावीज़ बनानेवाले तांत्रिकों के अनुसार कुछ विशिष्ट प्रकार के कोष्ठक आदि) जिसके भरने या बनाने में कोई भय नहीं होता।
नक़्शे जलाली (अ.पु.)-वह यंत्र (नक़्श-तावीज़ बनानेवाले तांत्रिकों के अनुसार कुछ विशिष्ट प्रकार के कोष्ठक आदि) जिसके भरने या बनाने में प्राणों का भय होता है।
नक़्शे तस्ख़्ाीर (अ.पु.)-वशीकरण-यंत्र, वह तावीज़ जो किसी को मुग्ध अथवा अपने वश में करने के लिए भरा अथवा बनाया जाता है।
नक़्शे दीवार (अ.$फा.पु.)-दीवार की चित्रकारी, दीवार पर चित्रकारी।
नक़्शे पा (अ.$फा.पु.)-दे.-'नक़्शे $कदमÓ।
नक़्शे बातिल (अ.पु.)-वह $गलत या अशुद्घ चित्र अथवा लेख जिसे मिटा दिया जाता है।
नक़्शे मुराद (अ.$फा.पु.)-इच्छापूर्ति-यंत्र, वह यंत्र अथवा तावीज़ जो मनोरथ की पूर्ति के लिए होता है।
नक़्शे सानी (अ.पु.)-वह चित्र जो चित्रकार का दूसरा प्रयास होता है और जो पहले चित्र की अपेक्षा बहुत सुन्दर तथा कलापूर्ण होता है।
नक़्शे सुवैदा (अ.पु.)-वह काला तिल जो हृदय पर होता है।
नक़्शे हुब (अ.पु.)-दे.-'नक़्शे तस्ख़्ाीरÓ।
नक़्शोनिगार (अ.$फा.पु.)-बेल-बूटे, फूल-पत्ती।
नक़्स (अ.पु.)-दोष, ऐब; भूल, त्रुटि; अशुद्घि, $गलती; न्यूनता, कमी। नोट-'नुक़्सÓ भी प्रचलित है।
नक्हत (अ.स्त्री.)-ख़्ाुशबू, महक, सुगन्ध। नोट-'निक्हतÓ भी प्रचलित है।
नख़्ा ($फा.स्त्री.)-रेशम की डोर; कच्चा रेशम; पतंग उड़ाने की डोर।
नख़्ााअ़ (अ.पु.)-रीढ़ की हड्डी, मेरुदण्ड।
नख़्ाील (अ.पु.)-खजूर का पेड़।
नख़्ाुद ($फा.पु.)-एक प्रसिद्घ अन्न चना, चणक।
नख़्ख़्ाास (अ.पु.)-वह बाज़ार जिसमें गुलामों अथवा दासों की ख़्ारीद-$फरांख़्त होती थी; घोड़ों और मवेशियों का बाज़ार।
नख़्चीर ($फा.पु.)-शिकार, आखेट; मारा हुआ शिकार, शिकार किया हुआ जानवर।
नख़्ल (अ.पु.)-खजूर का पेड़; कोई पेड़, वृक्ष, द्रुम, विटप।
नख़्लबंद (अ.$फा.पु.)-माली, बा$गबान।
नख़्लबंदी (अ.$फा.स्त्री.)-पेड़ लगाना, उद्यान या उपवन को सजाना।
नख़्िलस्तान (अ.$फा.पु.)-मरुस्थल या रेगिस्तान के इलाके में वह हरा-भरा क्षेत्र जहाँ खजूर के पेड़ हों।
नख़्ले ताबूत (अ.पु.)-ईरान में शव ले जाते समय उसे सजाते थे, यही सजावट 'नख़्ले ताबूतÓ कहलाती थी।
नख़्ले तूर (अ.पु.)-वह पेड़ जिस पर हज्ऱत मूसा को ईश्वर का प्रकाश दिखाई पड़ा था।
नख़्ले मरयम (अ.पु.)-खजूर का वह सूखा पेड़ जिसके नीचे हज्ऱत मरयम प्रसव-पीड़ा से दु:खित होकर बैठ गई थीं और वह हरा-भरा हो गया था।
नख़्ले मातम (अ.$फा.पु.)-दे.-'नख़्ले ताबूतÓ।
नख़्वत (अ.स्त्री.)-दे.-'निख़्वतÓ, वही शुद्घ उच्चारण है।
नख़्शब ($फा.पु.)-तुर्कीस्तान का एक नगर जहाँ से हकीम इब्नेअता (मुक़न्ना) ने एक चाँद निकाला था जो बारह मील दूर तक रौशनी फेंकता था।
नख़्स (अ.पु.)-चुभाना, कोंचना, गड़ाना।
नग ($फा.पु.)-'नगीन:Ó का लघुरूप, दे.-'नगीन:Ó।
न$ग़म (अ.पु.)-'नग़्म:Ó का बहु., नग़्में, गाने।
नगीं ($फा.पु.)-दे.-'नगीना:Ó; अँगूठी का वह नग जिस पर नाम आदि खुदा रहता है।
नगीन: ($फा.पु.)-रत्न, नग, अँगूठी में जड़ा जानेवाला पत्थर।
नगीन:गर ($फा.पु.)-दे.-'नगीन:साज़Ó।
नबीन:साज़ ($फा.पु.)-अँगूठी पर नगीना जडऩेवाला।
नग्ज़़ ($फा.वि.)-श्रेष्ठ, उत्तम, उम्दा; अद्भुत, विचित्र, अजीब; पहेली, प्रहेलिका।
नग्ज़़क ($फा.वि.)-अच्छा, श्रेष्ठ, उत्तम, बेहतरीन; सुन्दर, ख़्ाुशनुमा; (पु.)-एक प्रसिद्घ फल आम, आम्र।
नग्ज़ग़ो ($फा.वि.)-अच्छी कविता करनेवाला।
नग़्म: (अ.पु.)-गीत, गान; सुरीली आवाज़।
नग़्म:जऩ (अ.$फा.वि.)-मधुर आवाज़ से गानेवाला, सुरीले स्वर में गानेवाला।
नग़्म:तराज़ (अ.$फा.वि.)-दे.-'नग़्म:जऩÓ।
नग़्म:रेज़ (अ.$फा.वि.)-दे.-'नग़्म:जऩÓ।
नग़्म:संज (अ.$फा.वि.)-दे.-'नग़्म:जऩÓ।
नग़्म:सरा (अ.$फा.वि.)-दे.-'नग़्म:जऩÓ।
नग़्म:सराई (अ.$फा.पु.)-गाना, अलापना।
नग़्मात (अ.पु.)-'नग़्म:Ó का बहु., गाने, गीत, नग्मे।
नज़ंद ($फा.वि.)-औंधा, अधोमुख; कमीना, अधम, नीच; कुपित, क्रोधित, $गुस्से से भरा हुआ।
नज$फ (अ.पु.)-अरब का एक प्रसिद्घ नगर जहाँ हज्ऱत अली का मज़ार है।
नजऱ (अ.स्त्री.)-निगाह, दृष्टि; ध्यान, ख्य़ाल; $गौर, विचार; जाँच, परख; कुदृष्टि, बुरी नजऱ जिससे विशेषकर बच्चों को हानि पहुँचती है। 'नजऱ से गिर के रहूँ या कि बन के ख़्ाास रहूँ, दुअ़ा करो कि मैं अपने ही आसपास रहूँÓ-माँझी
नजऱअंदाज़ (अ.$फा.वि.)-उपेक्षित, जिस पर ध्यान न दिया गया हो। 'नजऱअंदाज़ करनाÓ-ध्यान न देना, उपेक्षा करना।
नजऱतंग (अ.$फा.वि.)-संकुचित दृष्टि,अनुदार, तंगख़्ायाल, ओछे विचार।
नजऱनवाज़ (अ.$फा.वि.)-दृष्टि-भावन, नेत्रप्रिय, आँखों को आनन्द देनेवाली चीज़।
नजऱ$फरेब (अ.$फा.वि.)-दृष्टि-आकर्षक, शुभ-दर्शन, आँखों को लुभानेवाला।
नजऱबंद (अ.$फा.वि.)-वह व्यक्ति जो राजादेश से किसी एक स्थान पर खुले तौर पर रहे लेकिन न तो कहीं आ-जा सके और न ही किसी से मिल सके।
नज़रबंदी (अ.$फा.स्त्री.)-ऐसा कारावास जिसमें प्रकट-रूप में तो आज़ादी हो लेकिन आदमी कहीं आ-जा नहीं सके और न ही किसी से मिल सके; जादू का खेल, दृष्टिबंध।
नजऱबाज़ (अ.$फा.वि.)-आँखें लड़ानेवाला, ताक-झाँक करने वाला; ताडऩेवाला, परख करनेवाला, पारखी।
नजऱबाज़ी (अ.$फा.स्त्री.)-जाँच, परख, अच्छे-बुरे की तमीज़; आँख लड़ाना, घूरना, ताक-झाँक करना।
नजऱी (अ.$वि.)-जो ध्यान देने योग्य न हो, सरसरी।
नजऱीय: (अ.पु.)-दृष्टिकोण, सोच, धारणा, नुक़्तए नजऱ।
नजऱीयात (अ.पु.)-'नजऱीय:Ó का बहु., अनेक दृष्टिकोण, धारणाएँ, नजऱीए।
नजऱे $गलत अंदाज़ (अ.$फा.स्त्री.)-भ्रम में डालनेवाली दृष्टि, ऐसी दृष्टि जो हर व्यक्ति अपनी तर$फ समझे, धोखे में डालनेवाली नजऱें।
नजऱे सानी (अ.स्त्री.)-पुनर्विचार, किसी तै-शुदा विषय पर फिर से विचार।
नज़ाइर (अ.पु.)-'नज़ीरÓ का बहु., नज़ीरें, मिसालें, दृष्टान्त, उदाहरण।
नज़ाकत ($फा.स्त्री.)-सुकुमारता, कोमलता, मृदुलता; सूक्ष्मता, बारीकी, लाघवता, ख़्ाूबी, न$फासत; कमज़ोरी, दुर्बलता; क्षीणता, ला$गरी; नाज़ुक-मिज़ाजी, छोटी से छोटी बात का भी तबीयत पर असर हो जाना।
नजात (अ.स्त्री.)-किसी बोझ से छुटकारा, भार-मुक्ति; बंधन-मुक्ति, छुटकारा; बख़्िशश, मोक्ष।
नजातदिहंद: (अ.$फा.वि.)-भार-मुक्त करनेवाला, मुक्ति देनेवाला, छुटकारा देनेवाला; मोक्ष देनेवाला।
नज़ाद ($फा.स्त्री.)-ख़्ाानदान, कुल, वंश।
नज़ा$फत (अ.स्त्री.)-निर्मलता, शुद्घता, पाकीजग़ी, पवित्रता।
नजाबत (अ.स्त्री.)-शरा$फत, कुलीनता।
नज़ार: (अ.पु.)-दे.-'नज़्ज़ार:Ó।
नज़ार ($फा.वि.)-दुर्बल, क्षीण, कमज़ोर, ला$गर।
नज़ारत (अ.स्त्री.)-ताजग़ी, हरा-भरापन। नोट-इसका 'ज़Ó उर्दू के 'ज़्वादÓ अक्षर से बना है।
नज़ारत (अ.स्त्री.)-निगरानी, निरीक्षण; नाजिऱ का पद; नाजिऱ का दफ़्तर। नोट-इसका 'ज़Ó उर्दू के 'ज़ोयÓ अक्षर से बना है।
नजाशी (अ.पु.)-हबस (एबीसीनिया) का वह राजा जिसने मुहम्मद साहब के ज़माने में मुसलमानों को अपने देश में शरण दी थी।
नजासत (अ.स्त्री.)-अपवित्रता, नापाकी; $िगलाज़त, विष्ठा।
नजाह (अ.स्त्री.)-मुक्ति, छुटकारा; मनोकामना की पूर्ति, इच्छा-पूर्ति, हाजत रवाई; समृद्घि, ख़्ाुशहाली।
नजिय: (अ.स्त्री.)-अंतर्मयी स्त्री, हमराज़ स्त्री, भेद जाननेवाली स्त्री।
नजिस (अ.वि.)-अशुद्घ, अपवित्र, नापाक, गन्दा; मल-दूषित, $गलीज़।
नजिसुलऐन (अ.वि.)-अत्यन्त अपवित्र वस्तु, वह चीज़ जो पूरी तरह अशुद्घ और नापाक हो तथा जिसका छूना भी वर्जित हो।
नज़ी$फ (अ.वि.)-निर्मल, शुद्घ, पाक, पवित्र।
नजीब (अ.वि.)-कुलीन, ख़्ाानदानी, शुद्घ रक्तवाला, जिसके ख़्ाानदान में दूसरी जाति अथवा रक्त का मेल न हो।
नजीबुत्तरफैन (अ.वि.)-माता और पिता दोनों ओर से कुलीन।
नज़ीर (अ.वि.)-भयभीत करनेवाला, डरानेवाला; पै$गम्बर साहब की एक उपाधि। नोट-इसकी 'ज़ीÓ उर्दू के 'ज़ेÓ अक्षर से बनी है।
नज़ीर (अ.स्त्री.)-उदाहरण, दृष्टांत, मिसाल; सदृश, समान, मिस्ल; हाईकोर्ट या प्रीवी कौंसिल का वह निर्णय जो किसी मुक़दमे में दावे की पुष्टि के लिए पेश किया जाए। नोट-इसकी 'ज़ीÓ उर्दू के 'ज़ोयÓ अक्षर से बनी है।
नज़ील (अ.पु.)-अतिथि, मेहमान, आगन्तुक; वह व्यक्ति जो किसी सराय या धर्मशाला में मुसा$िफर के रूप में उतरे।
नज़्अ़ (अ.स्त्री.)-दम निकलना, प्राणों का अन्त, चंद्रा (मरने से पहले आँखों की वह अवस्था जब टकटकी बँध जाती है), जांकनी।
नज़ए रवाँ (अ.$फा.स्त्री.)-दम निकलना, चंद्रा (मरने से पहले आँखों की वह अवस्था जब टकटकी बँध जाती है), जांकनी।
नज़्ज़ार: (अ.पु.)-दृश्य, सैर, तमाशा; दर्शन, दीदार।
नज़्ज़ार:गाह (अ.$फा.स्त्री.)-विनोद-स्थल, सैरगाह।
नज़्ज़ार:पसंद (अ.$फा.वि.)-जो अच्छे-अच्छे दृश्य देखने का शौ$कीन हो, जिसे नज़्ज़ार:बाज़ी पसन्द हो।
नज़्ज़ार:$फरेब (अ.$फा.वि.)-आँखों को लुभानेवाला, निगाहों का आकर्षित करनेवाला।
नज़्ज़ार:बाज़ (अ.$फा.वि.)-नज़्ज़ार: देखने का शौ$कीन, ताका-झाँकी और घूराघारी करनेवाला।
नज़्ज़ार:बाज़ी (अ.$फा.स्त्री.)-ताका-झाँकी, घूराघारी, आँखें सेंकना, आँखें लड़ाना।
नज़्ज़ार:संज (अ.$फा.वि.)-दे.-'नज़्ज़ार:पसंदÓ।
नज्जार (अ.पु.)-खाती, तरखान, बढ़ई, काष्ठ-शिल्पी, तक्षक।
नज़्ज़ारए जमाल (अ.पु.)-अच्छी सूरतों के दर्शन।
नज़्ज़ारगी (अ.$फा.स्त्री.)-नज़्ज़ार:बाज़ी, नजऱ, दृष्टि।
नज्जारी (अ.स्त्री.)-काष्ठकार का काम, बढ़ई का काम, बढ़ई का पेशा, बढ़ई-कर्म की मज़दूरी।
नज्द (अ.पु.)-टीला, ऊँची भूमि; अरब का एक प्रदेश जहाँ से 'वहाबिय:Ó सम्प्रदाय का जन्म हुआ।
नज़्द ($फा.वि.)-'नज़्दीकÓ का लघुरूप, दे.-'नज़्दीकÓ और दे.-'निज़्दÓ, दोनों शुद्घ हैं।
नज़्दीक ($फा.वि.)-निकट, $करीब, समीप, (अव्य.)-राय में, ख़्ायाल में, विचार में, समझ से।
नज़्दीकबीं ($फा.वि.)-'दूरबींÓ का उलटा या विपरीत, जो केवल अपने आसपास देखे, दूर तक नजऱ न दौड़ाए।
नज़्दीकी ($फा.स्त्री.)-निकटता, समीपता, $कुर्बत।
नज्म (अ.पु.)-सितारा, तारा, उडु।
नज़्म (अ.स्त्री.)-काव्य, शाइरी, पद्य, (पु.)-संघटन, संगठन, तंज़ीम, संस्था; क्रम, तर्तीब; प्रबन्ध् व्यवस्था, इंतिज़ाम।
नज़्मगुस्तर (अ.$फा.वि.)-कवि, काव्यकार, शाइर।
नज़्मगो (अ.$फा.वि.)-ऐसा कवि अथवा शाइर जो काव्य अथवा शाइरी की तमाम कि़स्मों में से केवल नज़्म ($गज़ल छन्द-विधान के विपरीत एक ही विषय पर की जानेवाली शाइरी) कहता हो।
नज़्मसंज (अ.$फा.वि.)-दे.-'नज़्मगुस्तरÓ।
नज्मुस्सा$िकब (अ.$फा.पु.)-उल्का, टूटनेवाला तारा।
नज्मे सा$िकब (अ.पु.)-उल्का, टूटनेवाला तारा।
नज़्मोनस$क (अ.पु.)-इंतिज़ाम, प्रबन्ध, बंदोबस्त, व्यवस्था।
नज़्मोनस्र (अ.स्त्री.)-गद्य और पद्य।
नज्ऱ (अ.स्त्री.)-भेंट, उपहार, तोह$फा; चढ़ावा, मन्नत; देना, प्रदान करना; $फातहा, नियाज।
नज्ऱान: (अ.$फा.पु.)-भेंट, उपहार, तोह$फा, उपायन; दक्षिणा; गुरु या पुरोहित आदि को भेंट, चढ़ावा।
नज्रान (अ.पु.)-चूल।
नज्ऱे अ़$कीदत (अ.स्त्री.)-ऐसा चढ़ावा, भेंट या उपहार जो भक्ति या आस्था प्रकट करने के लिए दिया जाए।
नज़्ल: (अ.पु.)-ज़ुकाम की ऐसी दशा जिसमें क$फ अथवा बल$गम निकलता हो।
नज्दा (अ.स्त्री.)-कान से मुँह लगाकर चुपके-चुपके बातें करना, कानाफूँसी करना।
नतफ़ (अ.पु.)-नोचना, खसोटना।
नतश (अ.पु.)-काँटा निकालना।
नताइज़ (अ.पु.)-'नतीज:Ó का बहु., नतीजे, परिणाम, फल।
नतीज: (अ.पु.)-फल, परिणाम, रिजल्ट, अंजाम; जाँच का परिणाम, परीक्षा का फल, परीक्षाफल; इच्छा, $गरज़,मतलब; अंत, आख़्ाीर। 'नतीज: देखनाÓ-फल पाना, किए का दण्ड भोगना।
नतीज:कुन (अ.$फा.वि.)-दे.-'नतीज:ख़्ोज़Ó।
नतीज:ख़्ोज़ (अ.$फा.वि.)-सारगर्भित, जिससे सुखद परिणाम मिले, जिससे अच्छा नतीजा निकले।
नतीजए इम्तिहान (अ.पु.)-परीक्षाफल, पढ़ाई की जाँच का परिणाम।
नतीजतन (अ.अव्य.)-फलत:, परिणामस्वरूप, फलस्वरूप, नतीजे में।
नतीन (अ.वि.)-बदबूदार, दुर्गन्धयुक्त।
नतूल (अ.पु.)-कष्ट मिटाने के लिए पानी गर्म करके शरीर की सिकाई करना; शरीर के किसी अंग पर धार देकर सेंक करने का ऐसा पानी जिसमें दवाएँ औटाई गई हों।
नत्न (अ.पु.)-बदबू, दुर्गन्ध।
नदफ़ (अ.पु.)-रुई धुनना या धुनकना।
नदम (अ.पु.)-शर्म, हया, लाज; लज्जा, व्रीडा, नदामत।
नदामत (अ.स्त्री.)-शर्म, हया, लाज, लज्जा; पछतावा, पश्चात्ताप, शर्मिनदगी, पशेमानी।
नदामतज़द: (अ.$फा.वि.)-जिसे अपने किए पर पछतावा हो, पश्चात्तापी; लज्जित, शर्मिन्दा, पशेमान, लजाया हुआ।
नदारद ($फा.वि.)-$गैर-हाजिऱ, $गाइब, लुप्त, रिक्त, विहीन, खाली।
नदीद: ($फा.वि.)-बहुत लालची, अत्यन्त लोभी, वह व्यक्ति जिसने बढिय़ा खाना या कोई चीज़ न खाई हो और किसी को खाते देखकर घूरे; जिसने देखा न हो; अतृप्त; मरभुक्खा, जो हर किसी के खाने पर नजऱ रखे।
नदीद (अ.वि.)-तुल्य, समान।
नदी$फ (अ.स्त्री.)-धुनी हुई रुई।
नदीम (अ.पु.)-दोस्त, साथी, सखा, पाश्र्ववर्ती, पास बैठनेवाला।
नदीर (अ.स्त्री.)-अप्राप्त, नायाब, वह वस्तु जो कहीं न पाई जाए (केवल महत्त्व बताने के लिए प्रयुक्त)।
नद्दा$फ (अ.पु.)-धुनिया, तूलकार, रुई धुनकनेवाला।
नद्दा$फ़ी (अ.स्त्री.)-तूलकर्म, रुई धुनकने और कपड़ों में भरने का काम, धुनियापन।
नद्मान (अ.वि.)-संकुचित, लज्जित, ख़्ाजिल।
नद्व: (अ.पु.)-परामर्श-गृह, लोगों के बैठकर विचार-विमर्श करने का स्थान, सभा-स्थल।
न$फक़: (अ.पु.)-बीवी-बच्चों का रोटी-कपड़ा।
न$फख़्ा (अ.पु.)-पेट फूलना, अ$फरा।
न$फर (अ.पु.)-दास, नौकर, सेवक; मज़दूर, श्रमिक; व्यक्ति, शख़्स।
न$फरत (अ.स्त्री.)-दे.-'नफ्ऱतÓ, वही शुद्घ उच्चारण है।
न$फस (अ.पु.)-श्वास, प्रश्वास, साँस; दम, पल, घड़ी, सायत, क्षण, लम्हा।
न$फसपर्वर (अ.वि.)-मनोहर।
न$फसशुमारी (अ.स्त्री.)-आख़्िारी साँसें जब मौत की घडिय़ाँ गिनी जाती हैं।
न$फसे बाज़पसीं (अ.$फा.पु.)-दे.-'न$फसे वापसींÓ।
न$फसे वापसीं (अ.$फा.पु.)-मरने के समय का अन्तिम श्वास जो जाकर फिर न आए, आख़्िारी साँस, जिस साँस के बाद जीवन समाप्त हो जाता है।
न$फह: (अ.स्त्री.)-ख़्ाुशबू, सुगन्ध।
न$फहात (अ.स्त्री.)-'न$फह:Ó का बहु, ख़्ाुशबुएँ, सुगन्धें।
न$फाइस (अ.पु.)-'न$फीसÓ का बहु., बढिय़ा और बहुमूल्य वस्तुएँ।
न$फाज़ (अ.पु.)-लागू होना, जारी होना, ना$िफज़ होना, एक चीज़ का दूसरी चीज़ में से निकलना।
न$फाद (अ.पु.)-समाप्त वस्तु, गई-गुजऱी वस्तु।
न$फासत (अ.स्त्री.)-उत्तमता, उम्दगी; स$फाई, स्वच्छता, निर्मलता; विशेषता, ख़्ाूबी; सूक्ष्मता, गूढ़ता, नज़ाकत; मृदुलता, कोमलता, लता$फत।
न$फासतपसंद (अ.$फा.वि.)-स्वयं सा$फ-सुथरा रहने तथा सब चीज़ों में स$फाई और सज्जा-सजावट पसन्द करनेवाला।
न$फासतपसंदी (अ.$फा.स्त्री.)-स्वयं सा$फ रहना तथा प्रत्येक वस्तु को सा$फ-सुथरी देखने की ललक या इच्छा।
न$फासते तब्अ़ (अ.स्त्री.)-स्वभाव की निर्मलता और मधुरता।
न$फी (अ.स्त्री.)-किसी वस्तु के अस्तित्व को न मानना; दूर करना, अलग करना; अस्वीकृति, इंकार, नामंज़ूरी। 'न$फी करनाÓ-इंकार करना, दूर करना। 'न$फी में जवाब देनाÓ-मना करना, नामंज़ूर करना।
न$फीर (अ.वि.)-घृणा करनेवाला, न$फरत फैलानेवाला; (स्त्री.)-वह आवाज़ जो सोने की अवस्था में निकलती है; स्वर, आवाज़; पुकार, चिल्लाना; न$फीरी, शहनाई।
न$फीरची (अ.$फा.पु.)-न$फीरी या शहनाई बजानेवाला।
न$फीरी (अ.$फा.स्त्री.)-शहनाई।
न$फीस (अ.वि.)-कोमल, मृदुल, लती$फ; स्वच्छ, निर्मल, सा$फ; उत्तम, बढिय़ा, उम्दा।
न$फूख़्ा (अ.पु.)-हुलास, सुँघनी, सूखी हुई दवाओं का वह चूर्ण जो नाक में फूँका जाता है।
न$फूर (अ.वि.)-घृणा करनेवाला, न$फरत फैलानेवाला, घृणी।
न$फ्अ़ (अ.पु.)-न$फा, लाभ, मुना$फा, प्राप्ति, $फाइदा; फल, परिणाम, नतीजा; सूद, ब्याज।
न$फ्अ़अंदोज़ी (अ.$फा.स्त्री.)-मुना$फा कमाना, लाभ कमाना, न$फा उठाना।
न$फ्अऱसाँ (अ.$फा.वि.)-लाभदायक, लाभ या मुना$फा पहुँचानेवाला, $फाइदा पहुँचानेवाला।
न$फ्अरसानी (अ.$फा.स्त्री.)-उपादेयता, लाभकारिता, लाभ या
मुना$फा पहुँचाना।
न$फ्ए ज़ाती (अ.पु.)-निजी लाभ, केवल व्यक्तिगत $फाइदा।
नफ़्ख़्ा:(अ.स्त्री.)-एक बूँद।
नफ़्ख़्ा (अ.पु.)-फँूकना; फूलना, विशेषत: पेट फूलना।
नफ़्ख़्ो शिकम (अ.पु.)-पेट का फूलना, अफारा।
नफ़्ख़्ो सूर (अ.पु.)-हज्ऱत इस्रा$फील का $िकयामत के दिन संसार का विध्वंश करने के लिए सूर (तुरही) फँूकना।
नफ़्त ($फा.पु.)-मिट्टी का तेल; उडऩेवाला माद्द:; बारूद। दे.-'निफ़्तÓ, दोनों श्सुद्घ हैं।
नफ़्$फाख़्ा (अ.$वि.)-बादी पैदा करनेवाली चीज़ें, अफारा पैदा करनेवाला आहार।
नफ़्$फाख़्ाी (अ.स्त्री.)-अफारा पैदा करना।
नफ्ऱत (अ.स्त्री.)-घिन, घृणा, कराहत; परहेज़, बचाव। 'कितनी नफ्ऱत टपक के गिरती है, अपना दामन निचोड़कर देखोÓ-माँझी
नफ्ऱतअंगेज़ (अ.$फा.वि.)-घृणा पैदा करनेवाला, घिन पैदा करनेवाला।
नफ्ऱतज़द: (अ.$फा.वि.)-घृणित, वह व्यक्ति जिससे घृणा की जाए।
नफ्ऱीं ($फा.स्त्री.)-फटकार, धिक्कार, लाÓनत-मलामत।। दे.-'निफ्ऱींÓ, शुद्घ उच्चारण वही है मगर उर्दू में 'नफ्ऱींÓ ही लिखते हैं।
नफ्ऱी (अ.स्त्री.)-एक आदमी।
नफ्ऱीदन ($फा.पु.)-घृणा करना।
नफ़्ल (अ.उभ.)-वह नमाज़ जिसके पढऩे का हुक्म न हो मगर सवाब के लिए पढ़ी जाए।
नफ़्स (अ.पु.)-श्वास, साँस, प्राणवायु, रूह; अस्तित्व, वुजूद; सच्चाई, सत्यता; सार, ख़्ाुलासा; काम-वासना, शहवत; लिंग, इंद्रिय, शिश्न, आलत।
नफ़्सकुश (अ.$फा.वि.)-इंद्रियनिग्रही, काम-वासनसओं का दमन करनेवाला, इंद्रियजित, ज़ाहिद, पारसा।
नफ़्सकुशी (अ.$फा.स्त्री.)-इंद्रिय-दमन, भोग-विलास की इच्छा का दमन, पारसाई, ज़ुह्द।
नफ़्सपरस्त (अ.$फा.वि.)-काम-वासनाओं में ग्रस्त, विषय-लोलुप, ऐयाश, शहवतपरस्त।
नफ़्सपरस्ती (अ.$फा.स्त्री.)-काम-लोलुपता, विषय-लम्पटता, ऐयाशी।
नफ़्सपर्वर (अ.$फा.वि.)-दे.-'नफ़्सपरस्तÓ।
नफ़्सानियत (अ.स्त्री.)-स्वार्थपरायणता, ख़्ाुद$गरज़ी; अभिमान, अहंवाद, $गुरूर।
नफ़्सानी (अ.$वि.)-काम-वासनाओं से सम्बन्ध रखनेवाली चीज़ें।
नफ़्सी नफ़्सी (अ.अव्य.)-अपनी-अपनी, आपाधापी (जहाँ प्रत्येक व्यक्ति को केवल अपनी चिन्ता हो, वहाँ यह शब्द बोला जाता है)।
नफ़्सीयात (अ.स्त्री.)-मनोविज्ञान।
नफ़्सुलअम्र (अ.पु.)-वास्तविकता, सच्ची बात, यर्थाथता, ह$की$कत।
नफ़्से अम्मार: (अ.पु.)-वह मानसिक शक्ति जो बुरे कामों की ओर प्रवृत्त करती है।
नफ़्से नाति$क: (अ.पु.)-श्वास, प्राणवायु, मुख्यार्थ, रूह; वह व्यक्ति जो किसी की नाक का बाल हो।
नफ़्से बहीमी ($फा.पु.)-पापी मन, विषय-वासनाओं में लिप्त रहनेवाला मन।
नफ़्से मत्लब (अ.पु.)-मुख्यार्थ, वास्तविक उद्देश्य, आशय, मक़्सद, अस्ल मतलब।
नफ़्से मुत्मइन्न: (अ.पु.)-वह मनोवृत्ति जो आत्मा में संतोष उत्पन्न करती है।
नफ़्से लव्वाम: (अ.पु.)-वह मनोवृत्ति जो बुरे कामों पर घृणा करती है, जिससे मनुष्य पछताता है।
नफ़्ह: (अ.पु.)-ख़्ाुशबू, अच्छी महक, सुगन्ध।
नफ़्हत (अ.स्त्री.)-ख़्ाुशबू, अच्छी महक, सुगन्ध।
नबर्द: ($फा.पु.)-बहादुर, शूर, वीर।
नबर्द ($फा.स्त्री.)-समर, युद्घ, लड़ाई, जंग।
नबर्दआज़्मा ($फा.वि.)-युद्घ-कुशल, रणशूर, जंग आज़मूद:।
नबर्दआज़्माई ($फा.स्त्री.)-समर, युद्घ, लड़ाई।
नबर्दआज़्मूद: ($फा.वि.)-युद्घानुभवी, जिसे रण-कौशल का पूर्ण ज्ञान हो, जिसे लड़ाई का का$फी अनुभव हो।
नबर्दगाह ($फा.स्त्री.)-समरांगण, रणक्षेत्र, युद्घस्थल, मैदाने जंग।
नबर्दपेश: ($फा.वि.)-रणशूर, जिसका काम ही युद्घ करना हो, जिसका काम ही लडऩा और मरना-मारना हो।
नबवी (अ.वि.)-नबी ($पै$गम्बर, ईश-दूत) से सम्बन्ध रखनेवाला (वाली) व्यक्ति या वस्तु।
नबात ($फा.स्त्री.)-मिश्री, खण्ड-शर्करा।
नबात (अ.स्त्री.)-ज़मीन से उगनेवाली सब्ज़ी और पेड़-पौधे।
नबातात (अ.स्त्री.)-उद्भिज्ज, ज़मीन से उगनेवाली चीज़ें।
नबाती (अ.वि.)-नबातात का, नबाताती।
नबातीयात (अ.स्त्री.)-उद्भिज्ज-विज्ञान, वृक्षायुर्वेद, नबातात का इल्म।
नबिश्त: ($फा.वि.)-लिखा हुआ, अंकित, नविश्त:। 'कोई नविश्त: मिले तो पढ़ लेना, व$र्क-व$र्क ही रहूँगा किताब होने तकÓ।
नबी (अ.पु.)-अवतार, पै$गम्बर, ईशदूत।
नबीज़ (अ.स्त्री.)-जौ या खजूर की मदिरा।
नबीद ($फा.स्त्री.)-दे.-'नबीज़Ó।
नबीर: ($फा.पु.)-पौत्र, पोता, बेटे का बेटा।
नबीस: ($फा.पु.)-दोहता, दौहित्र, नवासा, बेटी का बेटा।
नबील (अ.वि.)-महान्, श्रेष्ठ, अजीम; बुद्घिमान्, मेधावी, अक़्लमंद; उत्तम, उम्दा; स्थूल, मेदुर, मोटा-ताज़ा।
नब्अ़ (अ.पु.)-सोते या स्रोत से पानी फूटना।
नब्$क (अ.स्त्री.)-बेरी।
नब्ख़्ा: ($फा.स्त्री.)-माचिस, दियासलाई।
नब्ज़ (अ.स्त्री.)-नाड़ी, शिरा, रक्त-वाहिनी, रोग उपचार के लिए देखी जानेवाली नाड़ी।
नब्ज़शनास (अ.$फा.वि.)-शिरा-विशेषज्ञ, नब्ज़ पहचाननेवाला, हकीम, वैद्य, चिकित्सक।
नब्बाज़ (अ.वि.)-नाड़ी-विशेषज्ञ, नब्ज़ पहचानने में बहुत ही कुशल।
नब्बाज़ी (अ.स्त्री.)-शिरा, नाड़ी अथवा नब्ज़ की अच्छी पहचान, नाड़ी पहचानने की विशेषज्ञता।
नब्बाश (अ.पु.)-कफऩचोर, $कब्र खोदकर मुर्दे का क$फन चुरानेवाला।
नब्बाशी (अ.स्त्री.)-$कब्र खोदकर मुर्दे का कफऩ उतारना या चुराना।
नब्श (अ.पु.)-$कब्र खोदना, $कब्र खोदकर मुर्दे का कफऩ उतारना या चुराना।
नब्शे $कुबूर (अ.पु.)-$कब्रें खोदकर कफऩ चुराना।
नम ($फा.पु.)-गीला, आद्र्र, तर; नमी, तरी, आद्र्रता। नमआलूद ($फा.वि.)-गीला, तर, आद्र्र।
नमक ($फा.पु.)-नून, लोण, लवण, मिल्ह; लावण्य, मलाहत; हुस्ने-कलाम, काव्य-सौन्दर्य।
नमकअफ़्शाँ ($फा.वि.)-ज़ख़्मों पर नमक छिड़कनेवाला।
नमकअफ़्शानी ($फा.स्त्री.)-ज़ख़्मों पर नमक छिड़कना।
नमकआलूद: ($फा.वि.)-वह चीज़ जिसमें नमक लगाया गया हो।
नमककोर ($फा.वि.)-विश्वासघाती, कृतघ्न, नमकहराम, मुहसिनकुश।
नमकख़्ाुर्द: ($फा.वि.)-दे-'नमकख़्वारÓ।
नमकख़्वार ($फा.वि.)-जिसने नमक खाया हो, स्वामिभक्त, नमकहलाल; नौकर, मुलाजि़म।
नमकचशी ($फा.स्त्री.)-भोजन का स्वाद मालूम करने के लिए भोजन का स्वाद चखना; पहले पहल बच्चे को रस्म चटाने की रस्म, अन्नप्राशन; स्वाद, मज़ा।
नमकज़ार ($फा.पु.)-दे.-'नमकसारÓ।
नमकदान ($फा.पु.)-नमक रखने का पात्र।
नमकपर्वर ($फा.वि.)-नमक लगाया हुआ।
नमकपर्वर्द: ($फा.वि.)-नमकख़्वार, नमक के वाले हुए, स्वामिभक्त, व$फादार; सेवक, नौकर।
नमकपाश ($फा.वि.)-ज़ख़्म पर नमक छिड़कनेवाला, कष्ट देनेवाला, व्यंग करनेवाला।
नमकपाशी ($फा.स्त्री.)-घाव पर नमक छिड़कना, व्यंग और कटाक्ष करना, दु:ख देना, कष्ट देना।
नमकसार ($फा.पु.)-नमक की खान, लवणाकर।
नमकहराम (अ.$फा.वि.)-विश्वासघाती, कृतघ्न, स्वामिघ्न, मुहसिनकुश।
नमकहलाल (अ.$फा.वि.)-स्वामिभक्त, कृतज्ञ, ह$कशनास।
नमकीं ($फा.वि.)-नमकीन, नमक मिला हुआ; लावण्य, मलीह।
नमकीन: ($फा.पु.)-रायता, दही में नमक-मिर्च मिलाकर बना हुआ खाद्य-विशेष।
नमकीनी ($फा.स्त्री.)-सलोनापन, साँवलापन, मलाहत; हुस्न, सौन्दर्य।
नमख़्ाुर्द: ($फा.वि.)-सीला हुआ, सीड़ा हुआ, जिसमें सीलन पहुँच गई हो।
नमगीर: ($फा.पु.)-शामियाना, वितान; एक प्रकार का छोटा शामियाना जो ओस से बचने के लिए होता है।
नमत (अ.पु.)-$िकस्म, प्रकार, तरह।
नमद ($फा.पु.)-ऊन या पश्म का मोटा बिस्तर, मुलायम बालों का बिस्तर या गद्दा, नम्दा।
नमदज़ीं ($फा.पु.)-वह नम्दा जो ज़ीन के नीचे घोड़े की पीठ पर डालते हैं।
नमदपोश ($फा.वि.)-कंबलपोश, मोटे कंबल का लिबास पहननेवाला।
नमदमू ($फा.वि.)-बड़े-बड़े बालोंवाला।
नमदीद: ($फा.वि.)-दे.-'नमख़्ाुर्द:Ó।
नमनाक ($फा.वि.)-बाद्र्र, गीला, तर।
नमरसीद: ($फा.वि.)-सीला हुआ, सीड़ा हुआ, जिसमें सीलन पहुँच गयी हो, नमख़्ाुर्द:।
नमा ($फा.पु.)-बढ़ोतरी, उपज, विकास। नोट-यह शब्द अकेला नहीं आता, 'नश्वोनमाÓ बोला जाता है।
नमाज़ (अ.स्त्री.)-मुसलमानों की ईश-प्रार्थना, जो हर रोज़ पाँच वक़्त की होती है और जिसमें 42 रक्अ़त नमाज़ पढ़ी जाती है। एक रक्अ़त एक बार खड़े होकर बैठने तक की होती है, जिसमें दो सज्दे और एक रुकूअ़ होता है।
नमाजग़ुज़ार (अ.$$फा.वि.)-पाबन्दी से नमाज़ पढऩेवाला, नियमित नमाज़ पढऩेवाला, धर्मनिष्ठ, दीनदार।
नमाज़ी (अ.$वि.)-नमाज़ का पाबन्द, नमाज़ पढऩेवाला।
नमाज़े ईद (अ.स्त्री.)-ईद की नमाज़ जो दो रक्अ़त होती है।
नमाज़े $कज़ा (अ.स्त्री.)-वह नमाज़ जो उसके नियत समय पर न पढ़ी जाकर बाद में पढ़ी जाए।
नमाज़े $कस्र (अ.स्त्री.)-वह नमाज़ जो यात्रा की दशा में पढ़ी जाए, उसमें $फजऱ् नमाज़ आधी पढ़ी जाती है और बा$की नमाज़ें नहीं पढ़ी जातीं।
नमाज़े जनाज़: (अ.स्त्री.)-वह नमाज़ जो मुसलमानों के जनाज़े पर मृतक की आत्मा की शान्ति के लिए पढ़ी जाती है।
नमिर (अ.पु.)-तेंदुआ, बाघ, व्याघ्र।
नमी ($फा.स्त्री.)-सील, सीलन, सीडऩ, आद्र्रता, तरी।
नमी$क: (अ.पु.)-पत्र, चिट्ठी।
नमीम (अ.पु.)-इधर की उधर लगानेवाला, आपस में झगड़ा करानेवाला, पिशुन, चु$गुलख़्ाोर।
नमू (अ.पु.)-दे.-'नुमूÓ, वही शुद्घ उच्चारण है।
नमून: ($फा.पु.)-बानगी; आदर्श, मिसाल; ढब, ढंग, तजऱ्; $िकस्म, प्रकार।
नम्माम (अ.पु.)-बहुत अधिक चु$गली खानंवाला, पिशुन, चु$गुलख़्ाोर।
नम्मामी (अ.स्त्री.)-चु$गुलख़्ाोरी, पिशुनता।
नम्ल: (अ.पु.)-चींटी, च्यूँटी, निपीलिका, एक चींटी।
नम्ल (अ.पु.)-च्यूँटी, चींटी, पिपीलिका।
नम्ली (अ.वि.)-नाड़ी-गति का एक प्रकार जिसमें नब्ज़ की चाल चींटी-जैसी मन्द हो जाती है।
नय ($फा.स्त्री.)-नरसल, नरकट; मुरली, बाँसुरी, वंशी।
नयच: ($फा.पु.)-हुक्के की नली या निगाली।
नय नवाज़ ($फा.वि.)-मुरलीधर, वंशी बजानेवाला, बाँसुरी बजानेवाला।
नयसाज़ ($फा.वि.)-बाँसुरी बनानेवाला, वंशीकार।
नयस्ताँ ($फा.पु.)-नरकट या नरसल का जंगल; वन, जंगल।
नयस्तानी ($फा.वि.)-वन्य, जंगली।
नय्यिर (अ.पु.)-सूरज, सूर्य, दिवाकर।
नर: ($फा.पु.)-टहनी, शाखा; लिंग, शिश्न; दूषित, निकृष्ट; नर, पुरुष प्राणी।
नर:देव ($फा.पु.)-भयानक राक्षस, विकट मूर्ति।
नर ($फा.पु.)-मादा का विपरीत, पुरुष प्राणी।
नरमी ($फा.स्त्री.)-दे.-'नर्मीÓ, वही शुद्घ उच्चारण है।
नरमेश ($फा.पु.)-नर भेड़, मेंढ़ा।
नरी ($फा.स्त्री.)-नरपन; बकरी का चमड़ा जो कमाया जाने के बाद जूते बनाने के काम आता है।
नरीन: ($फा.पु.)-नर, जैसे-'$फजऱ्ंदे नरीन:Ó अर्थात् लड़का।
नरीमान ($फा.पु.)-सुप्रसिद्घ पहलवान रुस्तम के दादा का नाम।
न$र्ग: ($फा.पु.)-भीड़, जमाव; घेरा, घिराव, मुहासरा; आ$फत, विपत्ति, मुसीबत।
न$र्गए आÓदा (अ.$फा.पु.)-दुश्मनों का घेरा।
नर्गिस ($फा.स्त्री.)-एक पुॅल का नाम; आँख।
नर्गिसी ($$फा.वि.)-नर्गिस-जैसा; नर्गिस का; नर्गिसी कबाब जो अण्डों पर कीमा चढ़ाकर बनाए जाते हैं।
नर्गिसे जादू ($फा.स्त्री.)-वह सुन्दर आँख जिसमें 'मोहनीÓ हो।
नर्गिसे बीमार ($फा.स्त्री.)-अधखुली आँख (प्रेमिका की आँख के लिए बोलते हैं), चश्मे बीमार।
नर्गिसे शहला ($फा.स्त्री.)-नर्गिस का वह फूल जिसके अन्दर पीलेपन के बदले कालापन हो।
नर्द ($फा.स्त्री.)-चौसर का खेल; चौसर की गोट।
नर्दबाज़ ($$फा.वि.)-चौसर का खिलाड़ी।
नर्दबान ($$फा.उभ.)-सीढ़ी, सोपान, नसैनी, निश्रेणी।
नर्म: ($फा.पु.)-कान की लौ, कर्णलता।
नर्म ($$फा.वि.)-कोमल, नाज़ुक, मृदुल, मुलायम; पिलपिला; शिथिल, ढीला; लोचदार; सुगम, सरल, आसान; जिसका $गुस्सा कम हो गया हो, जिसका कोप ढीला पड़ गया हो; सहिष्ण़, बुर्दबार; हलका, अगुरु।
नर्मआवाज़ ($$फा.वि.)-कोमल और मधुर स्वरवाला।
नर्मआहनी ($फा.स्त्री.)-बदहाली; दीनता, हीनता, दरिद्रता।
नर्मए गोश ($फा.पु.)-कान की लौ, कर्णलता।
नर्मख़्ाू ($$फा.वि.)-जिसके स्वभाव में नरमी हो, नेकदिल, विनीत, नम्र स्वभाववाला, मतीन, संजीद:।
नर्मगर्दन ($$फा.वि.)-वशीभूत, आज्ञाकारी।
नर्मज़बान ($$फा.वि.)-मृदुभाषी, मधुरभाषी, शीरींज़बान।
नर्मतबीअ़त (अ.$$फा.वि.)-दे.-'नर्मख़्ाूÓ।
नर्मदिल ($$फा.वि.)-सहृदय, आद्र्र-हृदय, रहमदिल।
नर्ममिज़ाज (अ.$$फा.वि.)-दे.-'नर्मख़्ाूÓ।
नर्मरौ ($$फा.वि.)-मंदगति, धीरे चलनेवाला, सुस्त गति से चलनेवाला।
नर्मी ($$फा.वि.)-सहृदयता, सदयता, रहमदिली; मृदुलता, मुलाइमत; कोमलता, नज़ाकत; मंदता, आहिस्तगी; धीमापन; सुगमता, आसानी; लघुत्व, अगुरुत्व; हलकापन; बुर्दबारी, गंभीरता।
नवद ($फा.वि.)-नव्वे, दस कम सौ।
नवर्द ($फा.प्रत्य.)-लपेटनेवाला अर्थात् स$फर तय करनेवाला, जैसे-'राहनवर्दÓ-रस्ता तय करनेवाला।
नवर्दीद: ($फा.वि.)-लपेटा हुआ।
नवा ($फा.स्त्री.)-गान, गाना; स्वर, ध्वनि, आवाज़; उपकरण, सामान।
नवाइब (अ.पु.)-'नाइब:Ó का बहु., विपत्तियाँ, आपत्तियाँ, मुसीबतें।
नवाख़्ाान: ($फा.पु.)-जेल, कारागार, $कैदख़्ााना।
नवाख़्त ($फा.वि.)-अनुकूल, मुआ$िफ$क़; समान, सदृश, तुल्य, बराबर।
नवागर ($फा.वि.)-गानेवाला, गायक, गवैया।
नवाज़ ($फा.प्रत्य.)-कृवा करनेवाला, जैसे-'$गरीबनवाज़Ó-$गरीबों पर कृवा करनेवाला; बजानेवाला, जैसे-'नय नवाज़Ó-बाँसुरी बजानेवाला।
नवाज़ाद: ($फा.पु.)-पौत्र, पोता, बेटे का बेटा।
नवाजि़ंद: ($फा.पु.)-कृपा करनेवाला; बजानेवाला।
नवाजि़ंदगी ($फा.स्त्री.)-बजाना।
नवाजि़श ($फा.स्त्री.)-कृपा, अनुकम्पा, दया, मेहरबानी।
नवाजि़शनाम: ($फा.पु.)-कृपापत्र, करमनाम:।
नवाजि़शात ($फा.स्त्री.)-'नवाजि़शÓ का बहु., अनुकम्पाएँ, कृपाएँ, दयाएँ।
नवाज़ीद: ($फा.वि.)-नवाज़ा हुआ, सम्मानित किया हुआ।
नवाद: ($फा.स्त्री.)-पौत्री, पोती, बेटे की बेटी।
नवादिर (अ.पु.)-'नादिर:Ó का बहु., अद्भुत वस्तुएँ, अजीबो$गरीब चीज़ें।
नवापरदाज़ ($फा.वि.)-दे.-'नवागरÓ।
नवा$िफज़ (अ.पु.)-'ना$िफज़:Ó का बहु., कान, नाक, मुँह आदि के सूराख़्ा।
नवा$िफल (अ.पु.)-'ना$िफल:Ó का बहु., वे नमाज़ें जो केवल सवाब के लिए पढ़ी जाएँ, $फजऱ् या वाजिब न हों।
नवामीस (अ.पु.)-'नामूसÓ का बहु., मर्यादाएँ।
नवाल: ($फा.पु.)-दे.-'निवाल:Ó, दोनों उच्चारण शुद्घ हैं।
नवाल (अ.स्त्री.)-कृपा, अनुकम्पा, दया; उपकार, एहसान; दानशीलता, बख़्िशश।
नवासंज ($फा.वि.)-दे.-'नवागरÓ।
नवास: ($फा.पु.)-धेवता, नाती, दोहता, दौहित्र, बेटी का बेटा।
नवासाज़ ($फा.वि.)-दे.-'नवागरÓ।
नवासिब (अ.पु.)-'नासिबीÓ का बहु., नासिबी सम्प्रदाय के लोग, हज्ऱत अली को न माननेवाले।
नवासी ($फा.स्त्री.)-धेवती, नातिन, बेटी की बेटी। नोट- इसका 'सÓ उर्दू के 'सीनÓ अक्षर से बना है।
नवासी (अ.स्त्री.)-माथे के बाल। नोट-इसका 'सÓ उर्दू के 'स्वादÓ अक्षर से बना है।
नवासीर (अ.स्त्री.)-वह ज़ख़्म जो अच्छा न हो, वह घाव जो भरे नहीं, 'नासूरÓ का बहु., मलद्वार का फोड़ा, भगन्दर।
नवाह (अ.पु.)-आसपास के प्रदेश, सीमावर्ती स्थान; चारों ओर का क्षेत्र, नगर के चारों ओर का इला$का।
नवाही (अ.पु.)-'नाहिय:Ó का बहु., नगर के चारों ओर, नगर के आसपास।
नवाही (अ.पु.)-'नह्इÓ का बहु., वे विषय जो धर्मानुसार निषिद्घ हों।
नवाहे मुल्क (अ.पु.)-किसी देश के चारों तर$फ का बाहरी क्षेत्र या इला$का।
नवाहे शह्र (अ.$फा.पु.)-किसी नगर के आसपास का क्षेत्र।
नविश्त: ($फा.वि.)-लिखित, लिखा हुआ, लेख, तह्रीर, (पु.)-लेखपत्र, स्टाम्प, तमस्सुक। दे.-'निविश्त:Ó।
नविश्त ($फा.स्त्री.)-लिखावट, तह्रीर। दे.-'निविश्तÓ।
नविश्तए $िकस्मत (अ.$फा.पु.)-मु$कद्दर, भाग्यलेख, प्रारब्ध, तक़्दीर का लिखा।
नविश्तए तक़्दीर (अ.$फा.पु.)-दे.-'नविश्तए $िकस्मतÓ।
नविश्तोख़्वाँद ($फा.स्त्री.)-लिखना-पढऩा, लिखा-पढ़ी।
नवी ($फा.वि.)-आधुनिक, जदीद; नया, नवीन; पाश्चात्य, पश्चिमी, मग्ऱीबी।
नवीस ($फा.प्रत्य.)-लिखनेवाला, जैसे-'अजऱ्ी नवीसÓ-अजिऱ्याँ लिखनेवाला।
नवीसिंद: ($फा.वि.)-लिपिक, लिखनेवाला।
नवेद ($फा.स्त्री.)-ख़्ाुशख़्ाबरी, शुभ-सूचना; निमंत्रण-पत्र, दावतनामा। दे.-'नुवेदÓ, दोनों रूप शुद्घ हैं।
नवेदे जाँफिज़़ा ($फा.स्त्री.)-प्राणों को आनन्द देनेवाली शुभ-सूचना।
नवेदे मक़्दम (अ.$फा.स्त्री.)-किसी महान् व्यक्ति के आने की शुभ-सूचना।
नव्वाब (अ.वि.)-राजा अथवा महाराजा का अनुवर्ती, बादशाह का सहायक; किसी रियासत का मुसलमान शासक; एक उपाधि जो प्राय: बड़े ज़मींदारों को दी जाती थी; ठाठ-बाट वाला आदमी।
नव्वाबज़ाद: (अ.$फा.पु.)-नव्वाब का लड़का।
नव्वाबी (अ.स्त्री.)-नव्वाब का पद; नव्वाबों का शासनकाल, राज, हुकूमत; समृद्घि, दौलतमंदी; अपव्यय, फि़ज़ूलख़्ार्ची; बहुत ठाठ-बाट।
नव्वाबे बेमुल्क (अ.$फा.पु.)-ऐसी नव्वाब (नवाब) जिसके पास कोई रियासत न हो। (इस शब्द का प्रयोग ऐसे व्यक्ति के लिए किया जाता है जिसके पास कुछ न हो मगर उसकी बातें लम्बी-चौड़ी हों)।
नशाँ ($फा.पु.)-'नशानÓ का लघुरूप, दे.-'नशानÓ।
नशा (अ.पु.)-शुद्घ रूप 'नश्श:Ó है मगर उर्दू में 'नशाÓ भी बोलते हैं।
नशात (अ.स्त्री.)-हर्ष, आनन्द, ख़्ाुशी। 'निशातÓ भी प्रचलित।
नशातअंगेज़ (अ.$$फा.वि.)-हर्षोत्पादक, आनन्द पैदा करनेवाला।
नशातअफ्ज़़ा (अ.$$फा.वि.)-ख़्ाुशी बढ़ानेवाला, आनन्दवर्धक।
नशातेकार (अ.$$फा.स्त्री.)-कार्य करने का जोश, काम करने की ललक या उमंग।
नशाते रूह (अ.स्त्री.)-आत्मा का आनन्द, रूह की ख़्ाुशी।
नशान ($फा.पु.)-दे.-'निशानÓ, दोनों शुद्घ रूप हैं मगर उर्दू में 'निशानÓ ही बोलते हैं।
नशास्त: ($फा.पु.)-गेहूँ का सत, गोधूमसार।
नशीं ($फा.प्रत्य.)-आसीन, बैठनेवाला, जैसे-'गद्दीनशींÓ-गद्दी वर बैठनेवाला।
नशीद ($फा.पु.)-गाना, नग़्म:। दे.-'निशेदÓ, दोनों शुद्घ हैं।
नशेबो$फराज़ (अ.पु.)-सुख-दु:ख, ऊँच-नीच।
नश्अ़त (अ.स्त्री.)-उत्पत्ति, पैदाइश, आविर्भाव।
नश्अ़ते सानिय: (अ.स्त्री.)-पुनर्जन्म, दुबारा जन्म; पुनर्जीवन; दुबारा उन्नति, पुनरुद्घार।
नश्अ़तैन (अ.स्त्री.)-दो उत्पत्तियाँ, एक संसार की और दूसरी $िकयामत के दिन की।
नश्र: (अ.पु.)-बच्चे के $कुरान कंठ कर लेने का संस्कार।
नश्र (अ.पु.)-मृतक का फिर से जीवित होना; घास का फिर से हरा होना; ख़्ाबर का सबमें फैलना।
नश्रुस्सौत (अ.पु.)-ध्वनि-संचार, ब्राडकास्ट, आवाज़ को हर तर$फ फैलाना।
नश्व (अ.पु.)-विकास, उपज, बालीदगी।
नश्वान (अ.स्त्री.)-मस्त।
नश्वोनमा (अ.पु.)-उगना और विकसित होना, परवरिश पाना।
नश्श: (अ.पु.)-नशा, मादकता; उन्माद, मस्ती; अभिमान, घमण्ड।
नश्श:आमेज़ (अ.$$फा.वि.)-जिस चीज़ में मादक-पदार्थ मिला दिया गया हो।
नश्श:आवर (अ.$$फा.वि.)-नशा पैदा करनेवाली चीज़, मादक।
नश्श:बाज़ (अ.$$फा.वि.)-नशे का आदी, जिसे किसी नशेवाली चीज़ खाने या पीने की लत हो।
नश्शए मै (अ.$फा.पु.)-मदिरा का नशा, शराब का नशा।
नश्शए सह्बा (अ.$फा.पु.)-मदिरा का नशा, शराब का नशा।
नस [स्स] (अ.स्त्री.)-$कुरान की वे सूक्तियाँ जिनका अर्थ स्पष्ट है; ऐसी बात जिसमें कोई सन्देह न हो; ऐसी बात जिसका पालन आवश्यक हो।
नस$क (अ.पु.)-व्यवस्था, प्रबन्ध, इन्तिज़ाम; क्रम, सिलसिला, तर्तीब। नोट-यह शब्द प्राय: अकेला नहीं बोला जाता, 'नज़्मÓ के साथ मिलाकर 'नज़्मोनस$कÓ बोला जाता है।
नस$कबंद (अ.$$फा.वि.)-प्रबन्धक, व्यवस्थापक, मुंतजि़म।
नसज (अ.पु.)-बुनाई।
न$फसत (अ.स्त्री.)-बराबर दो भागों में बाँटना, आधों-आध करना; ह$क, न्याय, इंसा$फ (निस्$फत)।
नसब (अ.पु.)-वंश, कुल, गोत्र, ख़्ाानदान।
नसबनाम: (अ.$फा.पु.)-वंशावली, वंशक्रम, वंशवृक्ष, कुर्सीनामा, शज्र:।
नसबी (अ.$वि.)-नसब से सम्बन्ध रखनेवाला।
नसम: (अ.पु.)-जीवधारी।
नसम (अ.पु.)-व्यक्ति, आदमी।
नसा (अ.स्त्री.)-गृद्घसी स्नायु, साइटिक नर्व, एक नस जो चूतड़ से टख़्ाने तक जाती है, इर्कुन्नसा।
नसाइह (अ.उभ.)-'नसीहतÓ का बहु., अच्छी शिक्षाएँ, नसीहतें, सदुपदेश।
नसारा (अ.पु.)-'नस्रानीÓ का बहु., ईसाई लाग।
नसीज (अ.$वि.)-बुना हुआ; वस्त्र, लिबास; एक रेशमी कपड़ा।
नसीब: (अ.पु.)-भाग्य, प्रारब्ध, मु$कद्दर, $िकस्मत।
नसीब:वर (अ.$फा.$वि.)-भाग्यवान्, भाग्यशाली, ख़्ाुश$िकस्मत।
नसीब (अ.पु.)-प्रारब्ध, भाग्य, $िकस्मत; लब्ध, प्राप्त, मयस्सर; अंश, भाग, हिस्सा।
नसीबे आÓदा (अ.पु.)-वह चीज़ जो अपने लिए न होकर अपने दुश्मनों के लिए हो; एक आशीर्वाद, जब कोई व्यक्ति किसी कष्ट या रोग में फँसा हो तो उसके मित्र उसका जि़क्र करते हुए बोलते हैं, जैसे-'नसीबे आÓदा, उनका मिज़ात कुछ नासाज़ हैÓ।
नसीबे ख़्ाुफ्त: (अ.$फा.पु.)-सोया हुआ भाग्य, दुर्भाग्यता, बद$िकस्मती।
नसीबे दुश्मनाँ (अ.$फा.पु.)-दे.-'नसीबे आÓदाÓ।
नसीम (अ.स्त्री.)-ठण्डी और धीमी हवा, मन्द और मृदुल समीर।
नसीमासा (अ.$फा.अव्य.)-'नसीमÓ की तरह, बहुत ही आहिस्ता और मृदुल चाल से।
नसीमे गुल (अ.स्त्री.)-फूलों की ख़्ाुशबू लिये आनेवाली हवा। 'नसीमे गुल मैं कई बार कह चुका तुझसे, मुझे न छेड़ कि मैं पतझड़ों का मारा हूँÓ-माँझी
नसीमे सहर (अ.स्त्री.)-भोर अथवा प्रात:काल की मन्द, शीतल और सुगन्धित हवा।
नसीमे सुब्ह (अ.स्त्री.)-दे.-'नसीमे सहरÓ। 'नसीमे सुब्ह कई बार कह दिया तुझसे, मुझे न छेड़ कि मैं गर्दिशों का मारा हूँÓ-माँझी
नसीर (अ.पु.)-सहयोगी, सहायक, सहाय, मददगार।
नसीहत (अ.स्त्री.)-अच्छी सीख, सदुपदेश; अच्छी सलाह, सत्परामर्श; इब्रत।
नसीहत आमेज़ (अ.$फा.वि.)-ऐसी बात जिसमें सदुपदेश शामिल हो।
नसीहतगर (अ.$फा.वि.)-उपदेशक, सदुपदेशक, अच्छी सीख देनेवाला, नसीहत करनेवाला।
नसीहतगुज़ार (अ.$फा.वि.)-दे.-'नसीहतगरÓ।
नसीहतगो (अ.$फा.वि.)-दे.-'नसीहतगरÓ।
नसीहतनाम: (अ.$फा.पु.)-वह पत्र जिसमें किसी बात के सम्बन्ध में नसीहतें लिखी हों।
नसीहतपिज़ीर (अ.$फा.वि.)-जो सदुपदेश ग्रहण करे, नसीहत माननेवाला, सलाह को अंगीकार करनेवाला, जि पर किसी उपदेश का असर हो, नसीहतपसंद।
नसूह (अ.वि.)-विशुद्घ, शुद्घ, निर्मल, बेमेल, ख़्ाालिस, जिसमें कोई मिलावट न हो; किसी बुरी बात की त्याग की दृढ़ प्रतिज्ञा।
नस्ख़्ा (अ.पु.)- एक प्रसिद्घ लिति जिसमें अरबी भाषा लिखी जाती है; किसी चीज़ को हटाकर उससे अच्छी चीज़ लेना; मिटाना, रद करना।
नस्तरन ($फा.स्त्री.)-सेवती, सेवती का फूल।
नस्ताÓली$क (अ.पु.)-एक प्रसिद्घ लिपि जिसमें उर्दू लिखी जाती है; सुसंस्कृत, सभ्य, शिष्ट, मुहज़्ज़ब।
नस्नास (अ.पु.)-मनुष्य के आकार का एक ऐसा जानवर जिसके केवल एक हाथ, एक पाँव और एक कान होता है।
नस्ब (अ.पु.)-स्थापना, रखना, $काइम करना; उर्दू में 'ज़बरÓ की मात्रा।
नस्बुलऐन (अ.पु.)-आशय, उद्देश्य, मक़्सद।
नस्या मंसिया (अ.अव्य.)-जो बात बिलकुल भूली जा चुकी हो। अरबी में इसका उच्चारण 'नस्य मंसीयाÓ है।
नस्र (अ.स्त्री.)-लेख, गद्य, इबारत (नज़्म का विपरीत)। नोट-इसका 'सÓ उर्दू के 'सेÓ अक्षर से बना है।
नस्र (अ.पु.)-गिद्घ, गीध, गृद्घ, कर्गस; एक बुत जो अरब में पूजा जाता है। नोट-इसका 'सÓ उर्दू के 'सीनÓ अक्षर से बना है।
नस्र (अ.स्त्री.)-मदद, सहायता, सहयोग। नोट-इसका 'सÓ उर्दू के 'स्वादÓ अक्षर से बना है।
नस्रनिगार (अ.$फा.पु.)-गद्य लेखक, नस्र लिखनेवाला।
नस्रनिगारी (अ.$फा.स्त्री.)-गद्य-रचना (लेख, कहानी आदि), नस्र लिखना।
नस्रानियत (अ.स्त्री.)-ईसाईयत, ईसाईपन।
नस्रानी (अ.पु.)-ईसाई, ईसा-मसीह को माननेवाले।
नस्रे अ़ारी (अ.स्त्री.)-सादा लेख, वह लेख जो अलंकार आदि से रिक्त हो।
नस्रे ताइर (अ.पु.)-राशिचक्र के उत्तर में तारों की एक आकृति जो उड़ते हुए गिद्घ के समान होती है।
नस्रे मु$कफ़्$फा (अ.स्त्री.)-वह गद्य जिसका हर वाक्य सानुप्रास हो।
नस्रे मुरज्जज़ (अ.स्त्री.)-ऐसा गद्य जिसके एक वाक्य के सभी शब्द दूसरे वाक्य के समान हों।
नस्रे मुसज्जा (अ.स्त्री.)-दे.-'नस्रे मु$कफ़्$फाÓ।
नस्रे वाकेÓ (अ.पु.)-दक्षिणी ध्रुव के पास ठहरे हुए गिद्घ के आकार की तारों की आकृति।
नस्ल (अ.स्त्री.)-कुल, वंश, गोत्र; जाति, प्रजाति; औलाद, संतान, संतति।
नस्लअफ्ज़़ाई (अ.$फा.स्त्री.)-संतान-वृद्घि, नस्ल बढ़ाना।
नस्लकशी (अ.$फा.स्त्री.)-दे.-'नस्लअफ्ज़़ाईÓ।
नस्लन बाद नस्लन (अ.अव्य.)-एक नस्ल के बाद दूसरी नस्ल, पुश्त दर पुश्त।
नस्वार (अ.पु.)-हुलास, सुँघनी।
नस्साज (अ.पु.)-झूठी बातें बनानेवाला, बातून; बुननेवाला, जुलाहा।
नस्साब (अ.पु.)-वंश-विद्या जाननेवाला।
नस्सार (अ.पु.)-गद्य-लेखक।
नहंग ($फा.पु.)-कुंभीर, घडिय़ाल, ग्राह, नाका।
नहज (अ.पु.)-ढंग, शैली, पद्घति; राजमार्ग, चौड़ी और कुशाद: सड़क; दे.-'नह्जÓ, दोनों शुद्घ हैं परन्तु अधिक प्रचलित 'नह्जÓ है।
नहल (अ.पु.)-मधुमक्खी, शहद की मक्खी।
नहस (अ.पु.)-काटना, कुतरना, डसना।
नहा$फत (अ.स्त्री.)-निर्बलता, अशक्ति, कमज़ोरी; क्षीणता, दुर्बलता, ला$गरी।
नहामी (अ.पु.)-दिन, दिवस, रोज़।
नहार ($$फा.वि.)-'नाहारÓ का लघुरूप, सवेरे से कुछ न खाए हुए, सुबह से खाली नेट, नहारमुँह।
नहारगाह ($फा.स्त्री.)-प्रात:काल, सवेरे का समय।
नहारी ($फा.स्त्री.)-नाश्ता, वह थोड़ा-सा खाना जिससे प्रात:काल का उपवास समाप्त करते हैें; एक प्रकार का शोरबादार गोश्त जिसे ख़्ामीरी रोटी से खाते हैं।
नही (अ.स्त्री.)-मनाही, रोक, निषेध; निषेधाज्ञा। शुद्घ उच्चारण 'नह्इÓ है।
नही$क (अ.स्त्री.)-गधा के बोलने अथवा रेंकने की आवाज़।
नहीद: ($फा.पु.)-दु:खी, चिन्तित।
नहीदन ($फा.पु.)-दु:खी होना, $गम करना; अंदेशा करना।
नही$फ (अ.वि.)-दुर्बल, कमज़ोर, अशक्त; क्षीण, क्षाम, दुबला, ला$गर।
नही$फुलजुस्स: (अ.वि.)-क्षीणकाय, दुबले शरीरवाला।
नही$फुलबदन (अ.वि.)-दे.-'नही$फुलजस्स:Ó।
नहीब (अ.पु.)-लुटेरा, डाकू, $गारतगर।
नहीम (अ.पु.)-लोभी, लालची।
नह्ज (अ.पु.)-शैली, ढंग, प्रकार, तजऱ्; मार्ग, पथ, रास्ता; युक्ति, तर्कीब।
नह्ब (अ.पु.)-डकैती, लूटमार, $गारतगरी।
नह्र (अ.स्त्री.)-नदी से काटकर निकाली हुई शाखा; कुल्या (नहर)।
नह्र (अ.पु.)-उष्ट्रवध, ऊँट की बलि अथवा $कुर्बानी।
नह्री (अ.वि.)-नह्र से सम्बन्ध रखनेवाला; नह्र के पानी से सींची जानेवाली भूमि।
नह्रे $फुरात (अ.$फा.स्त्री.)-कू$फे में बहनेवाली नदी, हज्ऱत इमाम हुसैन को जिसका पानी पीने से रोक दिया गया था।
नह्रे लबन (अ.स्त्री.)-दूध की नह्र।
नह्व (अ.पु.)-ढंग, तरी$का, प्रणाली, पद्घति, शैली; समान, तुल्य, मिस्ल; (स्त्री.)-व्याकरण की वह शाखा जिससे वाक्यों में शब्दों का परस्पर सम्बन्ध और उनकी स्थिति जानी जाती है।
नह्वी (अ.वि.)-व्याकरण का ज्ञाता, इल्मे नह्व जाननेवाला।
नह्स (अ.वि.)-अमांगलिक, अशुभ, मनहूस।
नह्स$कदम (अ.वि.)-जिसका आगमन शुभ न हो, जिसका आना मनहूस हो।
नह्सरू (अ.$फा.वि.)-अशुभ-दर्शन, जिसकी सूरत देखने पर अमंगल की आशंका घेर ले, जो देखने में बुरा लगे, जिसकी सूरत मनहूस हो।
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