चौ
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चौंकना (हिं.क्रि.अक.)-भय, पीड़ा आदि के कारण सहसा काँप उठना; चौकन्ना या ख़्ाबरदार होना; चकित होना, भौचक्का होना; शंकित होना; भड़कना।चौंधना (हिं.क्रि.अक.)-इस प्रकार चमकना कि किसी की आँखों के आगे चकाचौंध हो।
चौक (हिं.पु.)-चौकोर खुली भूमि; घर के बीच का खुला चौकोर स्थान, आँगन, सहन।
चौकस (हिं.वि.)-ख़्ाबरदार, चौकन्ना, होशियार, सावधान; तौल में पूरा, ठीक।
चौकसी (हिं.स्त्री.)-होशियारी, सावधानी, ख़्ाबरदारी।
चौगाँ ($फा.पु.)-'चौगानÓ का लघु., दे.-'चौगानÓ।
चौगाँबाज़ ($फा.वि.)-चौगान (पोलो) खेलनेवाला।
चौगाँबाज़ी ($फा.स्त्री.)-पोलो का खेल।
चौगान ($फा.पु.)-एक खेल जिसमें घोड़ों पर चढ़कर गेंद से खेला जाता है, पोलो; नगाड़ा बजाने की लकड़ी।
चौगानबाज़ी ($फा.स्त्री.)-चौगान खेलना।
चौगानी ($फा.पु.)-वह घोड़ा जो पोलो के खेल के लिए सधा हुआ हो।
चौगिर्द ($फा.पु.)-चारों ओर, चारों तर$फ।
चौगोश: ($फा.हिं.वि., हिं-चौ, $फा-गोश:)-जिसके चार कोने हों, चौकोर।
चौगोशिया ($फा.हिं.स्त्री.)-एक प्रकार की चौकोर टोपी।
चौत: ($फा.वि.)-चार तहोंवाला, चार तल वाला।
चौतर: ($फा.पु.)-मकान के आगे का $फर्श, चबूतरा।
चौदह तब$क ($फा.पु.)-सात तल पृथ्वी और सात तल आकाश के मिलाकर चौदह तल।
चौदानी ($फा.पु.)-कानों में पहनने का आभूषण।
चौपाँ ($फा.पु.)-'चौपानÓ का लघु., दे.-'चौपानÓ।
चौपान ($फा.पु.)-रेवड़ चरानेवाला, चरवाहा।
चौपानी ($फा.स्त्री.)-रेवड़ चराने का काम, चरवाहागीरी, रेवड़ चराने की मज़दूरी।
चौपाल (हिं.स्त्री.)-बैठक, गाँव का पंचायती मकान जिसमें पंच-सरपंच बैठते हैं या मुसा$िफर ठहरते हैं।
चौब$गला ($फा.पु.)-अँगरखे या अचकन की ब$गल के नीचे का हिस्सा।
चौबच्चा ($फा.पु.)-दे.-'चहबच्चाÓ।
चौराहा (हि.पु.)-वह स्थान जहाँ चार रस्ते या सड़कें मिलती हों, चौरास्ता, चौमुहानी।
चौसिंद: ($फा.वि.)-चिपकनेवाला।
चौसीद: ($फा.वि.)-चिपका हुआ।
चौसीदन ($फा.क्रि.)-चिपकना।
चौसीदनी ($फा.वि.)-चिपकने योग्य।
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