Wednesday, October 14, 2015


ता

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ता ($फा.अव्य.)- तलक, तक।
ताअ़त (अ.स्त्री.)- पूजा, आराधना, उपासना, बन्दगी, इबादत।
ताअ़तगाह (अ.स्त्री.)- उपासना-घर, मन्दिर, मस्जिद, गिर्जा आदि।
ताअ़ात (अ.स्त्री.)- 'ताअ़तÓ का बहु., इबादतें, आराधनाएँ, उपासनाएँ, पूजाएँ।
ताइअ़ (अ.वि.)- आज्ञाकारी, आदेश का पालन करनेवाला।
ताइन (अ.वि.)- तीर से घायल करनेवाला, बाण मारनेवाला; ताÓना देनेवाला।
ताइ$फ: (अ.पु.)- समुदाय, जमाअ़त, दल; नर्तकी या वेश्या और उसके साजि़न्दे आदि, तवाइ$फ का एकवचन।
ताइ$फ (अ.वि.)- तवा$फ करनेवाला, किसी चीज़ के चारों तर$फ फिरनेवाला, परिक्रमा करनेवाला; सोते में आनेवाला ख़्ायाल।
ताइब (अ.वि.)- परित्याग करनेवाला, तौबा करनेवाला, पाप या किसी बुरी अ़ादत पर लज्जित होकर उससे अलग रहने की प्रतिज्ञा करनेवाला।
ताइर (अ.पु.)- हवा में उडऩेवाला, वायुमण्डल में विचरण करनेवाला, पक्षी, पखेरू, चिडिय़ा, परिन्द।
ताइरे अ़र्श (अ.पु.)- अ़र्श (आकाश यानी ईश्वर का निवास-स्थान) तक उडऩेवाला, 'जिब्रीलÓ $िफरिश्ता, देवदूत, आकाशगामी पक्षी।
ताइरे $िकब्ल:नुमा (अ.$फा.पु.)- दिशा बतानेवाले यंत्र की सुई, दिग्दर्शक-यंत्र की सुई, $कुत्बनुमा की सुई।
ताइरे $कुद्स (अ.पु.)- दे.- 'ताइरे अ़र्शÓ।
ताइरे लाहूत (अ.पु.)- दे.- 'ताइरे अ़र्शÓ। ब्रह्मïलोक तक उड़कर जानेवाला।
ताइरे सिद्र: (अ.पु.)- दे.- 'ताइरे अ़र्शÓ।
ताइल (अ.पु.)- न$फा, लाभ, $फायदा।
ताई (अ.पु.)- अरब का एक $कबील: (वंश) जिसमें 'हातिमÓ पैदा हुआ। नोट- हातिम के नाम के साथ वंश का नाम लगा होने के कारण ही उसे 'हातिमताईÓ कहते हैं।
ताईद (अ.स्त्री.)- पुष्टि, तस्दी$क; दावे के प्रमाण में कोई दस्तावेज़ आदि; सहायता, मदद, सहयोग; पक्षपात, हिमायत।
ताईदी शहादत (अ.$फा.स्त्री.)- वह गवाही या बयान जो किसी दावे की पुष्टि करे।
ताईदे आस्मानी (अ.$फा.स्त्री.)- दैवी सहायता, $गैबी मदद, अनायास ऐसी बात हो जाना जिससे किसी कठिन काम में सफलता प्राप्त हो जाए।
ताईदे $गैबी (अ.स्त्री.)- दे.- 'ताईदे आस्मानीÓ।
ताईदे मज़ीद (अ.स्त्री.)- किसी एक बात का समथ्रन जो एक के बाद दूसरा करे; अत्यधिक सहायता।
ताईदे रब्बानी (अ.स्त्री.)- दे.- 'ताईदे आस्मानीÓ।
ताÓईन (अ.स्त्री.)- निश्चय, तअय़्युन; नियुक्ति।
ताÓऊन (अ.पु.)- एक महामारी, प्लेग।
ताऊस (अ.पु.)- मोर, मयूर, शिखी, वर्ही।
ताए $करशत (अ.स्त्री.)- उर्दू 'अबजदÓ के हिसाब से '$करशतÓ वाली 'तेÓ।
ताए स$कील: (अ.स्त्री.)- हिन्दी का 'टÓ।
ता$क: (अ.पु.)- कपड़े का थान। नोट- जिस प्रकार घोड़े के लिए 'रासÓ, हाथी के लिए 'जंज़ीरÓ, रुपए के लिए 'मुब्लि$गÓ आता है उसी प्रकार कपड़े के थान के लिए 'ता$क:Ó आता है।
ता$क (अ.पु.)- मोखला, दीवार में बना छोटा मेहराबदार खोल; वह अेक जिसका विभाजन दो से न हो पाए, जैसे- 3, 5, 7, 9; निपुण, दक्ष, चतुर; समाप्त, ख़्ात्म (इस अर्थ में केवल ता$कत के लिए आता है, जैसे- 'ता$कत ता$क हो गयी अर्थात् शक्ति समाप्त हो गयी)।
ता$कच: (अ.$फा.पु.)- छोटा ता$क।
ता$कत (अ.स्त्री.)- शक्ति, बल, ज़ोर; सामथ्र्य; साहस, मजाल; उत्साह, उमंग, हौसला; पात्र, ज़$र्फ; सत्त, राज, हुकूमत।
ता$कतआज़्माई ($फा.स्त्री.)- ज़ोर लगाना, कोशिश करना।
ता$कतवर (अ.$फा.पु.)- बलवान्, शक्तिशाली, ज़ोरावर।
ताकिस्तान (अ.पु.)- अंगूर का बा$ग।
ता$की ($फा.स्त्री.)- एक लम्बी टोपी जो ता$क के आकार की होती है; वह घोड़ा जिसकी एक आँख छोटी हो तथा दूसरी बड़ी।
ताकीद (अ.स्त्री.)- निर्देश देना, किसी बात का ज़रूर करने या न करने का आदेश देना; कोई बात ज़ोर देकर कहना; इस्रार, हठ, जि़द।
ताÓ$कीद (अ.स्त्री.)- किसी वाक्य में शब्दों का ऐसा उलट-फेर कर देना कि अर्थ समझने में कठिनाई हो; इस तरह पर्दे में बात करना कि समझ में न आए; बहुत-सी गाठें डाल देना।
ताकीदन (अ.वि.)- ताकीद के साथ, ज़ोर देकर।
ताकीदी (अ.वि.)- जिस पर की ताकीद की गयी हो, ज़रूरी, सख़्त।
ताकीदी हुक्म (अ.पु.)- आवश्यक आदेश या निर्देश।
ताकीदे अकीद (अ.स्त्री.)- बहुत ही कड़ी ताकीद, सख़्त निर्देश।
ताकीदे माÓनवी (अ.स्त्री.)- किसी वाक्य या शेÓर में किसी शब्द का ऐसा अर्थ लेना जो उसके साधारण अर्थ के विपरीत हो।
ताÓकीदे लफ़्ज़ी (अ.स्त्री.)- किसी वाक्य या शेÓर में शब्दों का ऐसा उलट-फेर कि अर्थ ही बदल जाए।
ताकीदे शदीद (अ.स्त्री.)- दे.- 'ताकीदे अकीदÓ।
ता कुजा ($फा.अव्य.)- कब तक, कहाँ तक।
ता$के निस्याँ (अ.पु.)- विस्म़ति का ता$क, विस्मृति-रूपी ता$क, जिसमें रखकर हर चीज़ भुला दी जाती है।
ताके ($फा.अव्य.)- दे.- 'ता कुजाÓ।
ताख़्ाीर (अ.स्त्री.)- विलम्ब, देर, ढील। 'सब्र बड़ा दुश्वार तलब, चाह बड़ी ताख़्ाीर पसन्दÓ।
ताख़्त: ($फा.वि.)- दौड़ा हुआ, भागा हुआ।
ताख़्त ($फा.स्त्री.)- लूटमार, $गारतगरी; हमला, आक्रमण; धावा, छापा।
ताख़्तोताराज ($फा.स्त्री.)- विध्वंश, लूटमार, लूट-खसोट; बर्बादी, तबाही, विनाश।
ता$िगय: (अ.वि.)- अत्याचारी, ज़ुल्म करनेवाला, ज़्यादती करनेवाला; घमण्डी; बिजली।
ता$गी (अ.वि.)- विद्रोही, राजद्रोही, बा$गी; अवज्ञाकारी, सरकश, ना$फर्मान।
ता$गूत (अ.पु.)- एक बुत; एक पिशाच; अत्यंत निर्दय और अत्याचारी व्यक्ति।
ता$गूती (अ.वि.)- पिशाचपन, शैतानी; पिशाचवृत्त, शैतान।
ताचंद ($फा.अव्य.)- कब तक, कहाँ तक।
ताज़: ($फा.वि.)- शादाब, तरोताज़ा; हाल का आया हुआ; हाल ही का पका हुआ; हाल का किया हुआ; हाल का बना हुआ; हाल का, तत्कालीन; नवीन, नूतन, नया; सरसब्ज़, हरा-भरा।
ताज़:कार ($फा.वि.)- नवाभ्यस्त, नौसिखिया।
ताज़:ख़्ायाल ($फा.वि.)- नयी सोचवाला, नवीन विचारोंवाला।
ताज़:ख़्ायाली ($फा.स्त्री.)- नयी सोच, नए विचार।
ताज़:तवान: ($फा.पु.)- दे.- 'ताज़:बदनÓ।
ताज़:दम ($फा.वि.)- जिसे थकन और आलस्य न हो, फ्ऱेश।
ताज़:दिमा$ग (अ.$फा.वि.)- जिसका मस्तिष्क थका हुआ न हो, जिस दिमा$ग पर अभी ज़रा भी ज़ोर न पड़ा हो।
ताज़:$िफक्र ($फा.पु.)- नयी चाल; छल, धोखा।
ताज़ ब ताज़: ($फा.वि.)- बिलकुल नया, बिलकुल हाल का; ताज़ा-ताज़ा, गर्मागर्म।
ताज़:बदन ($फा.पु.)- स्वस्थ्य शरीर, मोटा शरीर।
ताज़:बहार ($फा.पु.)- नवीनता, नयापन; हरा-भरापन।
ताज़:मज़्मून ($फा.पु.)- नवीन विषय।
ताज़:मश्$क (अ.$फा.वि.)- दे.- 'ताज़:कारÓ।
ताज़:वारिद (अ.$फा.वि.)- नवागत, जो अभी-अभी बाहर से आया हो, हाल ही में आया हुआ।
ताज़:विलायत (अ.$फा.वि.)- जो अभी-अभी किसी अन्य देश से आया हो और इस देश की भषा तथा चाल-चलन से अनभिज्ञ हो।
ताज़:शिगू$फ: (अ.$फा.स्त्री.)- नयी कली, नवीन कली; नयी बात, अद्भुत बात।
ताज ($फा.पु.)- मुकुट, राजमुकुट, शाही टोपी; पक्षियों के सिर पर की टोपी, शिखा।
ताज़ ($फा.प्रत्य.)- आक्रमण करनेवाला, हमलावर, हमला करनेवाला; ($फा.स्त्री.)- आक्रमण, हमला; दौड़, ताख़्त।
ताज ए शम्अ़ (ताजे शम्अ़) ($फा.स्त्री.)- दीपक की लौ।
ताज़गी ($फा.स्त्री.)- हरा-भरापन, सरसब्ज़ी; नवीनता, नयापन; चेहरे की रौन$क, मुखश्री, मुखाभा; प्रफुल्लता, उत्साह, $फरहत; प्रसन्नता, ख़्ाुशी; शीतलता, तरी, तरावट।
ताज गुज़ारी ($फा.स्त्री.)- दे.- 'ताजपोशीÓ।
ताजदार ($फा.पु.)- मुकुटधारी, राजा, नरेश, बादशाह।
ताजपोशी ($फा.पु.)- अभिषेक, राज्याभिषेक, राजगद्दी, राजा के सिंहासन पर बैठना।
ताजबख़्श ($फा.पु.)- राजा, नरेश, सम्राट्, बादशाह।
ताजवर ($फा.पु.)- दे.- 'ताजदारÓ।
ताजवरी ($फा.स्त्री.)- बादशाहत।
ताजि़ंदगी (अ.$फा.अव्य.)- जीवन-भर, तमाम उम्र, आजन्म, जीवन-पर्यन्त, यावज्जीवन।
ताÓजि़य: (अ.पु.)- हज्ऱत इमाम हुसैन के रौज़े की नक़्ल जिसका जुलूस मुहर्रम में उठता है।
ताÓजि़य:दार (अ.$फा.पु.)- ताÓजि़या बनाने और उठानेवाला।
ताÓजि़य:दारी (अ.$फा.स्त्री.)- ताÓजि़या बनाना, उठाना और रौशनी व$गैर: करना।
ताÓजि़यत (अ.स्त्री.)- किसी के मर जाने पर उसके घर शोक प्रकट करने जाना, पुरसा।
ताÓजि़यतख़्ाान: (अ.$फा.पु.)- शोक-गृह, वह घर जहाँ किसी की मृत्यु का शोक मनाया जा रहा हो।
ताÓजि़यतगाह (अ.$फा.स्त्री.)- दे.- 'ताÓजि़यतख़्ाान:Ó।
ताÓजि़यतनाम: (अ.$फा.पु.)- शोक-पत्र, किसी के मरने पर उसके उत्तराधिकारियों द्वारा अपने सम्बन्धियों को सूचित करने के लिए लिखा गया शोक का पत्र।
ताजि़यान: ($फा.पु.)- चाबुक, कोड़ा, प्रतोद, कशा।
ताजिर (अ.पु.)- व्यवसायी, व्यापारी, सौदागर, वणिक्।
ताजिरान: (अ.$फा.अव्य.)- व्यवसायियों-जैसा, जैसा व्यापारियों के लिए होता है वैसा।
ताज़ी ($फा.वि.)- अरब की भाषा, अरबी; अरब का घोड़ा; अरब का रहनेवाला; शिकारी कुत्ता।
ताजीक ($फा.पु.)- अरब की वह संतान जो ईरान में रहकर जवान हुई हो।
ताज़ीख़्ाान: ($फा.पु.)- श्वानागार, कुत्तों के रहने का घर, जहाँ कुत्ते पाले और रखे जाएँ।
ताज़ीन ($फा.पु.)- कान उमेठना; सावधान करना; सूचित करना, आगाह करना।
ताज़ीनज़ाद ($फा.वि.)- अरब की नस्ल का घोड़ा।
ताÓज़ीब (अ.स्त्री.)- पीडि़त करना, कष्ट देना, दु:ख पहुँचाना, मुसीबत खड़ी करना।
ताÓज़ीम (अ.स्त्री.)- सम्मान, इज़्ज़त; आदर, सत्कार; प्रणाम, तस्लीम, अभिवादन।
ताÓज़ीर (अ.स्त्री.)- दण्ड देना, सज़ा देना।
ताÓज़ीरात (अ.स्त्री.)- 'ताÓज़ीरÓ का बहु., सज़ाएँ; दण्ड-विधान, सज़ाओं से सम्बद्घ न्याय की पुस्तक।
ताÓजील (अ.स्त्री.)- शीघ्रता करना, जल्दी करना; जल्दी, शीघ्रता।
ताज़ीस्त ($फा.अव्य.)- आजीवन, जि़न्दगी-भर, आजन्म, पूरी जि़न्दगी, जीवन-पर्यन्त।
तात (अ.पु.)- मस्त ऊँट; लम्बा, दिलेर और झगड़ालू आदमी।
ताता ($फा.स्त्री.)- निचली ज़मीन।
तातार ($फा.पु.)- तुर्किस्तान का एक क्षेत्र जहाँ तातारी रहते हैं।
तातारी ($फा.पु.)- तातार का रहनेवाला।
तातिर ($फा.पु.)- गाढ़ा दूध।
ताÓतीर (अ.स्त्री.)- इत्र में बासना, सुगन्धित करना।
ताÓतील (अ.स्त्री.)- निठल्लापन, बेकारी; अवकाश, $फुर्सत; छुट्टी; स्कूल, दफ़्तर या कार्यालय आदि के बन्द होने का दिन।
तातूर ($फा.पु.)- धतूरा, धत्तूर, एक प्रसिद्घ विषैला फल।
ता दमे ज़ीस्त ($फा.अव्य.)- जब तक दम में दम है, जब तक शरीर में आख़्िारी साँस है तब तक, जीवन-भर, ताज़ीस्त।
ताÓदाद (अ.स्त्री.)- संख्या, शुमार; गणना, गिनती; अनुमिति, कूत, अंदाज़ा।
ताÓदिय: (अ.पु.)- रोग का एक स्थान से दूसरे स्थान तक या एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक जाना; व्याकरण में अकर्मक क्रिया को सकम्रक बनाना।
तादीन (अ.स्त्री.)- अवगत कराना।
तादीब (अ.स्त्री.)- शिष्ट बनाना, अदब सिखाना; घुड़की देना; कान मरोडऩा; सज़ा देना, दण्ड देना।
ताÓदील (अ.स्त्री.)- समता, बराबरी; एक वस्तु को दूसरी वस्तु के बराबर करना; ठीक करना, दुरुस्त करना; टेढ़ या बाँक निकालना, सीधा करना।
ताÓन: (अ.पु.)- उपालम्भ, गिला; आलोचना, निन्दा, बुराई; व्यंग, कटाक्ष, तंज़।
ताÓन:ज़न (अ.$फा.वि.)- ताÓन: देनेवाला, कटाक्ष करनेवाला।
ताÓन:ज़नी (अ.$फा.स्त्री.)- ताÓन: देना, कटाक्ष करना।
ताÓन (अ.उभ.)- व्यंग, कटाक्ष, ताÓन:; तीर मारना।
तानीस (अ.स्त्री.)- स्त्रीलिंग होना; स्त्रीलिंग।
तानीस ($फा.पु.)- आदत डालना; प्यार करना, पे्रम करना, मुहब्बत करना।
ताÓनोतश्नीअ़ (अ.स्त्री.)- व्यंग और कटाक्ष, तरह-तरह के ताने; लानत-मलामत।
तापाक (अ.स्त्री.)- व्याकुलता, बेचैनी, घबराहट।
ता$फी ($फा.स्त्री.)- टोपी।
ताफ़्त: ($फा.वि.)- बल दिया हुआ, बटा हुआ; चमका हुआ;
चमकदार, रौशन; एक प्रकार का रेशमी कपड़ा।
ताब: ($फा.पु.)- रोटी पकाने का बर्तन, तवा। नोट- इसका 'ताÓ उर्दू के 'तेÓ अक्षर से बना है।
ताब: ($फा.स्त्री.)- शराब, मद्य, मदिरा; खजूर; ($फा.पु.)- मदीना शरी$फ। नोट- इसका 'ताÓ उर्दू के 'तोयÓ अक्षर से बना है।
ताब ($फा.स्त्री.)- ज्योति, आभा, चमक; उष्णता, गर्मी; पेच, बल, ख़्ाम; सामथ्र्य; ज़ोर, शक्ति, बल; बर्दाश्त्, सहन-शक्ति; ($फा.प्रत्य.)- चमकानेवाला, रौशन करनेवाला, जैसे- 'जहाँताबÓ- जहान यानी दुनिया को चमकानेवाला।
ताबइम्काँ (अ.$फा.अव्य.)- अपने सामथ्र्य के अनुसार, यथासंभव, यथाशक्ति।
ता ब कमर ($फा.अव्य.)- कमर तक, कमर तक आया या पहुँचा हुआ, जैसे- 'ता ब कमर ज़ुल्$फ थीं उस हुस्न कीÓ अर्थात् उस सौन्दर्य यानी सुन्दर हसीना के बाल उसकी कमर तक आए हुए थे।
ताब कुजा ($फा.अव्य.)- कहाँ तक, कब तक, ता कुजा, ताकि।
ता बकै ($फा.अव्य.)- दे.- 'ताब कुजाÓ।
ताबख़्ाान: ($फा.पु.)- गर्म किया हुआ कमरा, गर्म मकान; गर्म हम्माम, गर्म स्नानागार; वह स्थान जहाँ चूल्हा या भट्टी हो।
ताब:ख़्ाान: ($फा.अव्य.)- घर तक, मकान तक।
ता ब गुलू ($फा.अव्य.)- गले तक।
ता ब ज़बाँ ($फा.अव्य.)- ज़बान तक, जिह्वïा तक।
ता ब ज़ीस्त ($फा.अव्य.)- जीवन-भर, जीते-जी, आजन्म, आजीवन, जीवन-पर्यन्त।
ताबदाद: (फा.वि.)- बल दिया हुआ, बटा हुआ, बलित।
ताबदान ($फा.पु.)- गवाक्ष, झरोखा, वातायन; मकान का रौशनदान।
ता ब दामन ($फा.अव्य.)- दामन तक।
ताबदार (फा.वि.)- बल दिया हुआ, बटा हुआ, बलित; ज्योतिर्मय, जाज्वल्यमान, ताबाँ, प्रकाशमान, दीप्त, रौशन, चमकदार, चमकता हुआ।
ताबनाक (फा.वि.)- ज्योतिर्मय, जाज्वल्यमान, ताबाँ, प्रकाशमान, दीप्त, रौशन, चमकता हुआ।
ताबनाकी ($फा.स्त्री.)- ज्योति, आभा, नूर, चमक, प्रकाश।
ता ब मक़्दूर (अ.$फा.अव्य.)- भरसक, अपनी ता$कत-भर, यथाशक्य, यथाशक्ति।
ता ब लब ($फा.अव्य.)- होंठों तक।
ता ब हद्दे (अ.$फा.अव्य.)- यहाँ तक, इस हद तक; जहाँ तक, जिस हद तक।
ता ब हयात (अ.$फा.अव्य.)- दे.- 'ता ब ज़ीस्तÓ।
ताबाँ (फा.वि.)- प्रकाशमान, दीप्त, रौशन, चमकता हुआ, मुनव्वर, ज्वलन्त।
ताबानी ($फा.स्त्री.)- नूर, आभा, ज्योति, रौशनी, प्रकाश।
ताबिंद: (फा.वि.)- ज्योतिर्मय, प्रकाशमान, रौशन, चमकनेवाला।
ताबिंदगी ($फा.स्त्री.)- आभा, नूर, रौशनी, चमक, ज्योति, प्रकाश, जगमगाहट।
ताबिअ़ (अ.वि.)- छापनेवाला; अनुसरण करनेवाला, शिष्य, भक्त, अनुयायी, आज्ञाकारी, वशीभूत।
ताबिई (अ.पु.)- वह अरब जिसने रसूल के किसी सिहाबी (निकटजन) को देखा हो।
ताबिए $फर्मान (अ.वि.)- आदेश माननेवाला, आज्ञापालक, हुक्म माननेवाला; भक्त, व$फादार।
ताबिए मुहमल (अ.पु.)- वह निरर्थक शब्द जो किसी अन्य शब्द से मिलाकर बोला जाता है, जैसे- 'पानी-वानीÓ या 'रोटी-वोटीÓ। इनमें 'वानीÓ और 'वोटीेÓ का कोई अर्थ नहीं है फिर भी लोग बोलते हैं।
ताÓबिय: (अ.पु.)- सँवारना, सजाना; युद्घ के लिए सेना को सजाना, तैयार करना; पच्चीकारी करना, जडऩा; क्रमबद्घ करना, तर्तीब देना।
ताबि$क (अ.पु.)- रोटी सेंकने का बर्तन, तवा।
ताबिन (अ.वि.)- अक़्लमन्द, बुद्घिमान, होशियार।
ताबिश ($फा.स्त्री.)- ज्योति, आभा, नूर, चमक, प्रकाश, ताबानी, जगमगाहट; तपन, उष्णता, गर्मी।
ताबिशे आफ़्ताब ($फा.स्त्री.)- सूरज की तेज़ चमक; धूप की गर्मी।
ताबिस्तान ($फा.पु.)- गर्मी का मौसम, ग्रीष्मकाल, गर्मी की ऋतु।
ताबीद: (फा.वि.)- चमका हुआ, चमकता हुआ, ज्योतिर्मय, जाज्वल्यमान, प्रकाशित।
ताबीद (अ.स्त्री.)- सदैव करते रहना, हमेशा-हमेशा करते रहना।
ताÓबीर (अ.स्त्री.)- स्वप्नफल बताना, स्वप्न का अच्छा-बुरा परिणाम बताना; कष्ट कल्पना करना, तौजीह करना; बताना, कहना।
ताबूत (अ.पु.)- वह संदू$क जिसमें शव को बन्द करके ज़मीन में गाड़ते हैं; एक प्रकार का ताजि़या जो शीअ़ा लोग उठाते हैं।
ताबेÓ (अ.वि.)- भक्त, अनुयायी, अनुकर्ता, मु$कल्लिद; ज़ेरे-हुक्म, वशवर्ती, वशीभूत, अधीन; आज्ञाकारी, $फर्मांबरदार।
ताबेÓ$गम (अ.$फा.स्त्री.)- दु:ख सहने की शक्ति, $गम को बर्दाश्त करने का साहस।
ताबेÓज़ब्त (अ.$फा.स्त्री.)- दु:ख और कष्ट की सहन-शक्ति, प्रेम के कष्ट सहने की शक्ति।
ताबेÓदार (अ.$फा.वि.)- आज्ञा माननेवाला, हुक्म माननेवाला, $फर्मांबरदार, आज्ञाकारी, अनुयायी।
ताबेÓ$फु$गाँ ($फा.स्त्री.)- आह करने की शक्ति।
ताबो तुवाँ ($फा.स्त्री.)- साहस, शक्ति, सामथ्र्य, ज़ोर, $कुव्वत।
ताÓम (अ.पु.)- स्वाद, रस, ज़ाइ$का, मज़ा।
ताम (अ.वि.)- सब, समस्त, सर्व; पूर्ण, समग्र, कुल, सारा।
तामात (अ.स्त्री.)- मिथ्या प्रदर्शन, कोरी बातें, ढपोरशंखी बातें, ढोंग; डींग, अहंवाद, ला$फ; बनावटी $फ$कीरों और साधुओं की वे डींगें जो वे अपनी दुकानदारी चलाने के लिए दूसरे लोगों के सामने मारते हैं और जिसमें वे अपनी करामातों और चमत्कारों का वर्णन बड़े ही चित्ताकर्षक एवं रोचक ढंग से करते हैं।
ताÓमिय: (अ.पु.)- आँखें फोडऩा, अन्धा करना; छिपाना, गोपन करना; 'अबजदÓ के हिसाब से निकाली गयी तारीख़्ा में कोई संख्या बढ़ाना, जिससे वर्षों की संख्या पूरी हो जाए, परन्तु इस प्रकार बढ़ाई गयी संख्या 'नौÓ से अधिक नहीं हो सकती, बरख़्िाला$फ 'तख्रि़ज़:Ó के जिसमें संख्या घटाने की कोई हद नहीं नियत है।
ताÓमीम (अ.स्त्री.)- किसी बात को सार्वजनिक कर देना, आम जनता तक पहुँचा देना, व्याप्ति, हर एक के लिए कर देना।
ताÓमीर (अ.स्त्री.)- निर्माण, रचना, बनाना; भवन आदि बनाना, वास्तु-क्रिया; सुधार, इस्लाह; बनावट, साख़्त; इमारत, बिल्डिंग, भवन।
ताÓमीरी (अ.वि.)- रचनात्मक, इस्लाही।
ताÓमीरे $कौम (अ.स्त्री.)- राष्ट्र-निर्माण, देश का सुधार; जाति-निर्माण, अपनी बिरादरी, $कौम या ख़्ाानदान का सुधार।
ताÓमीरे मुल्क (अ.स्त्री.)- राष्ट्र-निर्माण, देश का सुधार।
ताÓमील (अ.स्त्री.)- आदेश मानना, आज्ञा का पालन करना, हुक्म मानना; किसी सम्मन या वारन्ट का निष्पादन।
ताÓमीलात (अ.स्त्री.)- न्यायालय में सम्मन आदि की तामीली का काम।
ताÓमीले हुक्म (अ.स्त्री.)- आज्ञा का पालन, आदेश माना, हुक्म की तामील।
तामेÓ (अ.वि.)- लालची, लोभी, लिप्सु, लोलुप।
तामेह (अ.वि.)- उच्च, बुलन्द; अवज्ञाकारी, सरकश; उद्दण्ड, उजड्ड।
ताम्म: (अ.स्त्री.)- सारा, सम्पूर्ण, सब, तमाम, समग्र।
तार ($फा.पु.)- किसी धातु का पतला सूत; तन्तु, डोरा; धागा, सूत्र; क्रम, सिलसिला; तार की ख़्ाबर, टेलिग्राम (पहले आवश्यक संदेश टेलिग्राम द्वारा ही भेजे जाते थे मगर मोबाइल फोन के आगमन के बाद भारत में जून-2013 में डाकघरों से यह सुविधा बन्द कर दी गयी); लस, लस का चेप; झड़ी, $कतार ($फा.वि.)- 'तारीकÓ का लघुरूप, अँधेरा, अँधियारा, तमिस्र।
तारक ($फा.पु.)- माँग, सीमंत; शिरस्त्राण, खोद; चोटी।
तारकश ($फा.पु.)- धातुओं के तार बनानेवाला।
तारकशी ($फा.स्त्री.)- धातुओं के तार बनाना, सोने-चाँदी के तार बनाना; कपड़े के तार अलग करके बेल-बूटे आदि बनाने का काम।
तार तार ($फा.वि.)- चिथड़ा कपड़ा; बिलकुल फटा-पुराना कपड़ा; टुकड़े-टुकड़े, धज्जी-धज्जी, रेज़ा-रेज़ा।
तारपोद ($फा.पु.)- दे.- 'तारोपोदÓ।
ताराब ($फा.पु.)- नष्ट, विनष्ट, बर्बाद; लूटमार, $गारतगरी; विनाश, बर्बादी।
ताराबगाह ($फा.स्त्री.)- लूट-पाट की जगह, वह जगह जहाँ डाकू-लुटेरे सक्रिय हों और लोग लुट जाते हों।
तारि$क (अ.पु.)- प्रात:काल में उदय होनेवाला एक तारा-विशेष; प्रत्येक वह चीज़ जो रात में निकले, इसलिए चोर और राहगीर को भी कहते हैं; इस्लाम का एक प्रसिद्घ सेनापति; दुर्घटना, सख़्त हादिसा।
तारिक (अ.वि.)- त्यागी, किसी चीज़ या ऐब का त्याग करनेवाला, छोडऩेवाला; घमण्डी, अहंकारी, अभिमानी।
तारिकुद्दुन्या (अ.वि.)- विरक्त, निवृत्त, जिसने दुनिया से पूरी तरह सम्बन्ध विच्छेद कर लिया हो।
तारिके दुन्या (अ.वि.)- दे.- 'तारिकुद्दुन्याÓ।
तारिके लज़्ज़ात (अ.वि.)- निस्पृह, निग्रही, जिसने संसार के सारे सुख-आनन्दों पर लात मार दी हो।
तारी (अ.वि.)- छा जानेवाला, ढँक लेनेवाला; छाया हुआ, ढाँके हुए।
ताÓरीक़ (अ.स्त्री.)- पसीना निकालना; दवाओं द्वारा शरीर से पसीना निकालना।
तारीक ($फा.वि.)- अँधेरा, अँधियारी, अंधकारमय, तमिस्र।
तारी$क ($फा.पु.)- जगाना, उठाना, बेदार करना।
तारीक चश्म (अ.$फा.वि.)- वह व्यक्ति जो दूर तक न देख सके अथवा जिसे रात में दिखाई न दे।
तारीक ज़मीर (अ.वि.)- अंत:मलिन, पापात्मा, कलुषित हृदय, काला मन।
तारीक दरूँ ($फा.वि.)- दे.- 'तारीक दिलÓ।
तारीक दिल ($फा.वि.)- जिसके मन में सच्चाई की लौ प्रज्वलित न होती हो, जिसके दिल में ईमान की रौशनी न हो, अन्धात्मा; ख़्ाबीस, दुष्टात्मा।
तारीक बातिन (अ.$फा.वि.)- दे.- 'तारीक दिलÓ।
तारीकिए शब ($फा.स्त्री.)- रात का अँधेरा, रात्रि-तमिस्र।
तारीकी ($फा.स्त्री.)- अँधियारा, अँधेरा, अंधकार, तीरगी; धँुधलापन।
तारीख़्ा (अ.स्त्री.)- माह की तिथि, डेट; मु$कद्दमे की सुनवाई का दिन; पिछले हालात का जि़क्र; इतिहास, तवारीख़्ा; इतिहास की किताब; 'अबजदÓ के हिसाब से निकाला हुआ किसी वा$िकए का साल; इतिहास-विज्ञान; वह इल्म जिसमें पिछले हालात और वा$िकयात का वर्णन हो। 'तारीख़्ावारÓ- तिथियों के क्रम से।
तारीख़्ागो (अ.$फा.वि.)- जिसे 'अबजदÓ के हिसाब से किसी घटना की तारीख़्ा निकालने का अभ्यास हो।
तारीख़्ादाँ (अ.$फा.वि.)- इतिहासवेत्ता, जिसे इतिहास की अच्छी जानकारी हो, इल्मे तारीख़्ा का माहिर।
तारीख़्ानवीस (अ.$फा.वि.)- इतिहासकार, इतिहास लिखनेवाला, तारीख़्ा लिखनेवाला, म़अ़र्रिख़्ा।
तारीख़्ावार (अ.$फा.वि.)- तिथियों के क्रम के अनुसार।
तारीख़्ाी (अ.वि.)- ऐतिहासिक, प्राचीन इतिहास से सम्बन्ध रखनेवाला, जैसे- 'तारीख़्ाी इमारतÓ- ऐतिहासिक भवन।
तारीख़्ाी वा$िकयात (अ.पु.)- ऐतिहासिक घटनाएँ।
ताÓरीज़ (अ.स्त्री.)- कोई वस्तु या बात सामने रखना, पेश करना; किसी दूसरे पर टालकर बात कहना; व्यंग करना, कटाक्ष करना; व्यंग, कटाक्ष; आपत्ति, एतिराज़, गिरिफ़्त।
ताÓरी$फ (अ.स्त्री.)- प्रशंसा, श्लाघा; परिचय, जानकारी; व्याख्या, तशीह; गुण, जौहर।
ताÓरी$फुल मज्हूल (अ.वाक्य.)- किसी अज्ञात चीज़ का परिचय अज्ञात चीज़ से, जैसे- कोई पूछे कि 'चुजऱ्कÓ किसे कहते हैं और उत्तर में कहा जाए 'उल्म$कÓ को।
ताÓरीब (अ.स्त्री.)- किसी दूसरी भाषा के शब्द को अरबी बनाना।
तारुम (अ.पु.)- भवन, प्रासाद, महल; अट्टालिका, बालाख़्ााना; लकड़ी का मकान।
तारे अन्कबूत (तार ए अन्कबूत) (अ.$फा.पु.)- मकड़ी के जाले का तार; बहुत ही कमज़ोर चीज़।
तारे अश्क (तार ए अश्क) ($फा.पु.)- आँसुओं का तार, रोने का सिलसिला।
तारे नज़र (तार ए नज़र) (अ.$फा.पु.)- दृष्टि का रश्मि-समूह, निगाह की शुअ़ाएँ।
तारे न$फस (तार ए न$फस) (अ.$फा.पु.)- साँस की डोर, साँस का सिलसिला, साँस का आना-जान, साँसों का क्रम।
तारे निगाह (तार ए निगाह) (अ.$फा.पु.)- दे.- 'तारे नज़रÓ।
तारे ब$र्की (तार ए ब$र्की) (अ.$फा.पु.)- विद्युत-तार, बिजली का तार।
तारे बाराँ (तार ए बाराँ) ($फा.पु.)- बरसात के पानी की झड़ी।
तारे मिस्तर (तार ए मिस्तर) (अ.$फा.पु.)- 'मिस्तरÓ का तार, लकीरें बनाने के पट्ठे का डोरा।
ता लबे गोर ($फा.अव्य.)- $कब्र के किनारे तक, $कब्र के मुँह तक।
तालल्लाह (अ.अव्य.)- ईश्वर जि़यादा करे, भगवान् बढ़त दें।
तालाब ($फा.पु.)- वापी, तड़ाग, कासार।
तालार ($फा.पु.)- खेतों की रखवाली करने के लिए चार खम्भों पर बनाया हुआ मंच, मचान, टाँड़।
तालिए ख़्ाुफ़्त: (अ.$फा.पु.)- सोता हुआ भाग्य, दुर्भाग्य।
तालिए ख़्वाबीद: (अ.$फा.पु.)- सोता हुआ भाग्य, दुर्भाग्य।
तालिए बेदार (अ.$फा.पु.)- जागता हुआ भाग्य, सौभाग्य।
तालिब (अ.पु.)- लालायित, लिप्सु, मुश्ता$क; अभिलाषी, इच्छुक, ख़्वाहिशमंद, आजऱ्ूमंद; याचक, माँगनेवाला।
तालिबे इल्म (तालिब ए इल्म) (अ.पु.)- छात्र, विद्यार्थी, पढऩेवाला।
तालिबे उक़्बा (तालिब ए उक़्बा) (अ.पु.)- मोक्ष, स्वर्ग और पुण्य का इच्छुक, दीनदार, धर्मनिष्ठ।
तालिबे ज़र (तालिब ए ज़र) (अ.$फा.पु.)- धनेच्छुक, धन चाहनेवाला, दुनियादार।
तालिबे दीदार (तालिब ए दीदार) (अ.$फा.पु.)- दर्शनों का अभिलाषी।
तालिबे दुन्या (तालिब ए दुन्या) (अ.पु.)- धनेच्छुक, धन चाहनेवाला, दुनियादार, तालिबे ज़र।
तालिबो मतलूब (तालिब ओ मतलूब) (अ.पु.)- नायक
और नायिका, प्रेमी और प्रेमिका, अ़ाशि$क और मा'शू$क।
ताÓलीक: (अ.पु.)- सरकार या ज़मींदार की ओर से खेतों की जिन्स पर लगायी हुई रोक ताकि वाद के निर्णय से पहले माल उठाया न जा सके।
ताÓली$क (अ.स्त्री.)- लटकाना, किसी चीज़ को दूसरी चीज़ के सहारे ठहराना।
ताली$फ (अ.स्त्री.)- दो या दो से अधिक वस्तुओं को परस्पर संयुक्त करना; अनेक लेखकों की कृतियों में से छाँटकर अलग एक पुस्तक बनाना, सम्पादन करना; इस प्रकार बनाई हुई पुस्तक; संयुक्त संग्रह या संकलन।
ताली$फे $कुलूब (ताली$फ ए $कुलूब) (अ.स्त्री.)- अपनी ओर लोगों के मन इस प्रकार आकर्षित करना जिसमें श्रद्घा और कृतज्ञता का भाव हो।
ताÓलीम (अ.स्त्री.)- शिक्षा देना, पढ़ाना; सिखाना, बताना; शिक्षा, पढ़ाई; उपदेश, नसीहत; गुरुमंत्र, दीक्षा; नाचने-गाने की शिक्षा।
ताÓलीमगाह (अ.$फा.स्त्री.)- पढऩे का स्थान, पाठशाला, मदरसा, स्कूल।
ताÓलीमयाफ़्त: (अ.$फा.वि.)- पढ़ा-लिखा, शिक्षित; शिष्ट, सभ्य, तमीज़दार।
ताÓलीमे जदीद (ताÓलीम ए जदीद) (अ.स्त्री.)- नवीन शिक्षा, नयी ताÓलीम, आजकल की पश्चिमी शिक्षा, आधुनिक शिक्षा।
ताÓलीमे निस्वाँ (ताÓलीम ए निस्वाँ) (अ.स्त्री.)- नारी-शिक्षा, स्त्री-शिक्षा, औरतों की ताÓलीम।
ताÓलीमे बालि$गाँ (ताÓलीम ए बालि$गाँ) (अ.स्त्री.)- प्रोढ़-शिक्षा, ऐसे लोगों की शिक्षा जिनकी आयु का$फी हो चुकी हो और जो अपने काम-धंधों में लगे हों।
ताÓलील (अ.स्त्री.)- कारण बताना; प्रमाण देना; व्याकरण की परिभाषा में 'अलि$फÓ, 'वावÓ अथवा 'येÓ को किसी दूसरे अक्षर से बदलना।
तालूत (अ.पु.)- इस्राईल जाति का एक शासक जो भिश्ती था, उसने 'जालूतÓ एक बड़े अत्याचारी नास्तिक को हज्ऱत दाऊद की सहायता से मारा था जो उस समय उसकी $फौज के सेनापति थे।
तालेÓ (अ.पु.)- उदय होनेवाला, निकलनेवाला; भाग्य, $िकस्मत, प्रारब्ध।
तालेÓ आज़्माई (अ.$फा.स्त्री.)- भाग्य की परीक्षा, प्रयत्न, कोशिश।
तालेÓमंद (अ.$फा.वि.)- सुभागीन, भाग्यवान्, ख़्ाुश इक़्बाल।
तालेÓवर (अ.$फा.वि.)- दे.- 'तालेÓमंदÓ।
तालेÓशनास (अ.$फा.वि.)- भविष्यवक्ता, ज्योतिषी।
तालेह (अ.वि.)- दुष्प्रकृति, दुराचारी, कदाचारी, बदआÓमाल।
तावक़्तेकि (अ.$फा.अव्य.)- जब तक कि।
तावान (अ.पु.)- क्षतिपूर्ति, नु$कसान का मुआवज़ा; अर्थदण्ड, जुर्माना; वह धन या सामान आदि जो हारा हुआ राष्ट्र विजेता को देता है।
तावाननाम: (अ.पु.)- प्रायश्चित-पत्र।
तावानी (अ.वि.)- सम्बन्धित।
तावाने जंग (तावान ए जंग) (अ.$फा.पु.)- वह र$कम या सामान जो पराजित राष्ट्र विजेता को देता है।
ताÓवी$क (अ.स्त्री.)- अति काल, विलम्ब, देर; टालमटोल, आजकल-आजकल।
ताÓवीज़ (अ.पु.)- वह का$गज़ जिस पर कोई मंत्र आदि लिखकर गले में डालते या बाहु पर बाँधते हैं, मंत्रचक्र, रक्षाकवच; $कब्र पर बना हुआ ईंटों या पत्थर का निशान; गले का एक आभूषण। 'कोई ताÓवीज़ ले आया किसी ने कुछ दवा लिक्खी, कि यूँ भूखे की $िकस्मत में ज़माने ने शि$फा लिक्खीÓ- माँझी
तावील (अ.स्त्री.)- स्पष्टीकरण, तौज़ीह; किसी बात अथवा कार्य करने का ऐसा कारण बताना जो लगभग-लगभग ठीक जान पड़े; किसी वाक्य का वास्तविक अर्थ से हटकर दूसरा अर्थ; स्वप्नफल कहना, ताÓबीर बताना।
ताश: ($फा.पु.)- एक प्रकार का छोटा ढोल।
ताश (उ.पु.)- खेलने के पत्ते, गंजि़$फा, (तु.प्रत्य.)- संगी, साथी, शरीक, साझेदार, जैसे- 'ख़्वाज़:ताशÓ- एक स्वामी के शरीक, अर्थात् वह नौकर जो दासता में एक स्वामी के शरीक हो।
ताशकंद ($फा.पु.)- रूसी तुर्किस्तान का एक नगर जो पहले ईरान के पास था। भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का दिल का दौरा पडऩे से इसी नगर में निधन हुआ था।
तास ($फा.पु.)- परात, बड़ा तश्त; वह कटोरा जो जल-घड़ी की नाँद में पड़ता है; सुनहरे तारोंवाला एक प्रकार का जड़ाऊ कपड़ा।
तासीम (अ.स्त्री.)- मुह्लत देना, समय देना; दोषी सिद्घ करना, अपराधी ठहराना।
तासीर (अ.पु.)- गुण, प्रभाव, असर; प्रकृति, स्वभाव।
तासीस (अ.स्त्री.)- नींव रखना, बुनियाद डालना; नींव, बुनियाद, आधार, न्यास।
तासेÓ (अ.वि.)- नवाँ, नवम्।
ताह (अ.वि.)- केवल।
ताहम ($फा.अव्य.)- तथापि, तो भी, फिर भी, तद्यपि, तदपि।
ताहिर (अ.वि.)- पुनीत, पवित्र, शुद्घ, पाक।
ताही ($फा.वि.)- बावर्ची, रसोइया।
ताहून: ($फा.स्त्री.)- चक्की।

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