तौ
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तौअऩोकर्हन (अ.अव्य.)- दिल पर जब्र करके, बिना इच्छा के विवशतापूर्वक।तौ$क (अ.पु.)- गोल हँसली; लोहे की गोल हँसली जो $कैदियों के गले में डाली जाती है; स्त्रियों के गले में पहनने की सोने-चाँदी की गोल हँसली; मन्नत की वह हँसली जो बच्चों को पहनाते हैं; वह गोल लकीर जो कुछ चिडिय़ों के गले में होती है।
तौका$फ (अ.पु.)- छत टपकना।
तौ$कीअ़ (अ.स्त्री.)- शासक या राजा का किसी राजादेश पर हस्ताक्षर करना; वह राजादेश जिसमें किसी बात पर क्षोभ अथवा क्रोध प्रकट किया गया हो; मोहर, निशान।
तौ$कीत (अ.पु.)- समय निर्धारित करना।
तौ$की$फ (अ.पु.)- सचेत करना, सावधान करना, ख़्ाबरदार करना; किसी काम को करने से रोकना।
तौ$कीर (अ.स्त्री.)- सम्मान, सत्कार, ताज़ीम, इज़्ज़त; प्रतिष्ठा, मान्यता, एहतिराम।
तौ$के $गुलामी (तौ$क ए $गुलामी) (अ.पु.)- पराधीनता की बेड़ी, $गुलामी की लाÓनत।
तौ$के मन्नत (तौ$क ए मन्नत) (अ.स्त्री.)- मन्नत की हँसली जो बच्चों को गले में पहनाते हैं।
तौ$के माह (तौ$क ए माह) (अ.$फा.पु.)- चन्द्र-बिम्ब, चाँद में पडऩेवाला घेरा।
तौ$के लाÓनत (तौ$क ए लाÓनत) (अ.पु.)- धिक्कार-रूपी गले की हँसली, धिक्कार की बौछार।
तौज़ीअ़ (अ.स्त्री.)- फैलाना, बिखेरना; खण्ड-खण्ड करना, टुकड़े करना, हिस्से-बख्ऱे करना।
तौजीद (अ.पु.)- दु:ख सहना, $गम उठाना।
तौज़ीन (अ.स्त्री.)- तुलवाना, वज़्न कराना; तोलना, वज़्न करना; तोल, वज़्न।
तौज़ी$फ (अ.पु.)- ईश्वर की प्रार्थना करना।
तौज़ीर (अ.पु.)- आरोप लगाना, दोष देना, इल्ज़ाम लगाना।
तौज़ीह (अ.स्त्री.)- व्याख्या, विवरण, तफ़्सील; स्पष्टीकरण, किसी बात को विस्तार से खोलकर कहना।
तौजीह (अ.स्त्री.)- कारण बताना, वजह ज़ाहिर करना; किसी की ओर मुँह करना, मुतवज्जेह होना; स्पष्ट करना, सा$फ करना, यह बताना कि ऐसा क्यों है।
तौतीन (अ.पु.)- आराम करना, विश्राम करना।
तौद (अ.पु.)- बड़ा पेड़, वृक्ष; टीला; पहाड़, पर्वत।
तौदीअ़ (अ.स्त्री.)- रुख़्सत करना, रवाना करना, विदा करना; हस्तांतरित करना, सौंपना।
तौनील ($फा.स्त्री.)- पहाड़ी सुरंग।
तौ$फ (अ.पु.)- परिक्रमा, किसी के चारों ओर फिरना।
तौ$फा$क (अ.पु.)- कार्य का अनुकूल होना।
तौ$िफय: (अ.पु.)- व$फा करना, वादा पूरा करना।
तौ$फी$क (अ.स्त्री.)- ईश्वर की कृपा, दैवानुग्रह; दैवयोग से ऐसे कारण पैदा हो जाना जिससे अभिलषित वस्तु की प्राप्ति में सुगमता हो; सामथ्र्य, शक्ति; योग्यता, पात्रता, अहलियत; उत्साह, उमंग, हौसला।
तौ$फी$केख़्ौर (अ.स्त्री.)- अच्छी कृतियों की तौ$फी$क।
तौ$फीन (अ.स्त्री.)- इच्छा करना, अभिलाषा करना।
तौ$फीर (अ.स्त्री.)- प्राचुर्य, आधिक्य, इफ्ऱात।
तौब: (अ.स्त्री.)- किसी बुरे काम से दूर रहने की दृढ़ प्रतिज्ञा; किसी बुरी आदत को छोडऩा; त्याग, तर्क, छोड़ देना; पछतावा, पश्चात्ताप; (अ.अव्य.)- धर्म के विरुद्घ या किसी बड़े अहंकार की बात सुनकर बोला जानेवाला शब्द, जिससे घृणा ओर न$फरत का इज़हार मंज़ूर होता है। 'न मेरी निगाहों से सागऱ छलकते, जो तौबा न करता पिलाने से पहलेÓ- डॉ शेरजंग गर्ग
तौब:नाम: (अ.$फा.पु.)- किसी बात से तौबा करने का लिखित पत्र।
तौब:शिकन (अ.$फा.वि.)- की हुई तौबा को तुड़वा देनेवाली बात। 'बात सा$की की न टाली जाएगी, तौबा करके तोड़ डाली जाएगीÓ।
तौबग ($फा.पु.)- कोष, ख़्ाजाना।
तौबीख़्ा (अ.स्त्री.)- घुड़की, झिड़की, भत्र्सना। नोट- यह शब्द अकेला नहीं बोला जाता, 'ज़ज्रÓ के साथ मिलाकर 'ज़ज्रो तौबीख़्ाÓ बोला जाता है।
तौर (अ.पु.)- चाल-ढाल, रंग-ढंग, रविश; लक्षण, लच्छन, अलामत; शैली, पद्घति, ढंग; आचरण, व्यवहार, तजऱ्े अमल।
तौर तरी$क: (अ.पु.)- रंग-ढंग, चाल-चलन, शैली, पद्घति।
तौरात (अ.स्त्री.)- वह आस्मानी-ग्रन्थ जो हज्ऱत मूसा पर उतरा था, तौरैत।
तौरिय: (अ.पु.)- मिथ्याचार, कूटाचार, कपट, मुँह पर कुछ होना और दिल में कुछ, मुना$फ$कत।
तौरीदन (अ.पु.)- लज्जित या शर्मिन्दा होना, झेंपना।
तौरीब (अ.स्त्री.)- टेढ़ा करना, ख़्ाम डालना; वक्रता, टेढ़ापन।
तौरीश (अ.पु.)- दंगा-$फसाद करना; लड़ाई-झगड़ा करना।
तौरीस (अ.पु.)- रेग करना। नोट- इसका 'सÓ उर्दू के 'सीनÓ अक्षर से बना है।
तौरीस (अ.पु.)- उत्तराधिकारी बनाना। नोट- इसका 'सÓ उर्दू के 'सेÓ अक्षर से बना है।
तौरैत (अ.स्त्री.)- वह आस्मानी-ग्रन्थ जो हज्ऱत मूसा पर उतरा था, तौरात।
तौल: ($फा.पु.)- बू अथवा गंध सूँघकर शिकार करनेवाला कुत्ता।
तौलब (अ.पु.)- गधे का बच्चा।
तौलिय: (अ.स्त्री.)- दे.- 'तौलियतÓ।
तौलियत (अ.स्त्री.)- किसी को किसी काम का प्रबन्धक नियुक्त करना, वली या मुतवल्ली बनाना; उत्तरदायी बनाना; उत्तराधिकारी बनाना।
तौलियतनाम: (अ.$फा.पु.)- उत्तराधिकारी बनाने का लिखित पत्र, मुतवल्ली बनाने की तहरीर।
तौलीद (अ.स्त्री.)- पैदा करना, जनना; पालन-पोषण करना; उत्पन्न करना, पैदा करना; पैदाइश, उत्पत्ति, प्रजनन।
तौलीद ख़्ाून (अ.$फा.स्त्री.)- ख़्ाून की पैदाइश, रक्त की उत्पत्ति, रक्त की वृद्घि।
तौलीदेमनी (अ.स्त्री.)- वीर्य की उत्पत्ति, वीर्य की वृद्घि।
तौशीम (अ.स्त्री.)- सुई से हाथ पर गोदना।
तौशीह (अ.स्त्री.)- एक अलंकार जिसमें कुछ शेÓरों या मिस्रों के पहले अक्षर एकत्र करने से किसी का नाम अथवा अक्षरों की संख्या 'अबजदÓ के हिसाब से जोडऩे पर कोई विशेष साल निकलता है; गले में हार डालना, सम्मान करना; सजाना, सँवारना।
तौसन ($फा.पु.)- घोड़ा, अश्व, तुरंग।
तौसिय: ($फा.पु.)- वसीयत करना।
तौसीअ़ (अ.स्त्री.)- विस्तार, फैलाव, कुशादगी; अधिक करना, जि़यादा करना; विस्तृत करना, वसीअ़ करना।
तौसीए इशाअ़त (अ.स्त्री.)- पुन: प्रकाशन, पुनर्मुद्रण।
तौसीए ज़बान (अ.स्त्री.)- भाषा का विस्तार करना।
तौसीए मीअ़ाद (अ.स्त्री.)- किसी काम का नियत समय बढ़ा देना।
तौसीए मुलाजि़मात (अ.स्त्री.)- सेवारत होने के पश्चात् अवधि बढ़ाना।
तौसी$क (अ.स्त्री.)- पुष्ट करना, दृढ़ करना, मज़बूत करना; दृढ़ता, मज़बूती; पुष्टि करना, समर्थन करना; समर्थन, पुष्टि।
तौसीख़्ा (अ.पु.)- मैला करना, गन्दा करना।
तौसीत (अ.पु.)- बीच में डालना, मध्य में लाना।
तौसी$फ (अ.पु.)- तारी$फ करना, प्रशंसा करना।
तौहीद (अ.स्त्री.)- ईश्वर को एक मानना, अद्वैतवाद।
तौहीदपरस्त (अ.$फा.वि.)- अद्वैतवादी, जो ख़्ाुदा को एक माने, ईश्वर को एक माननेवाला।
तौहीन (अ.स्त्री.)- अनादर, अपमान, तिरस्कार, बेइज़्ज़ती।
तौहीने अ़दालत (अ.स्त्री.)- किसी न्यायालय का अपमान, न्यायपालिका की अवमानना।
तौहीने इश्$क (अ.स्त्री.)- प्रेम का अनादर, प्यार का अपमान।
तौहीने बज़्म (अ.स्त्री.)- गोष्ठि का अपमान, सभा का अनादर।
तौहीने मुहब्बत (अ.स्त्री.)- दे.- 'तौहीने इश्$कÓ।
तौहीम (अ.स्त्री.)- शंका में डालना, वहम में डालना।
तौहीश (अ.स्त्री.)- भगदड़ मचाना, भाग-दौड़ मचाना, भगाना।
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